ए सीन अच्छा नहीं है, पब्लिक कहां जाए
सरगुजा इलाके में बीते दिनों जो कुछ घटा वह किसी भी मायने में अच्छा नहीं कहा जा सकता। प्रशासन ही जब दादागीरी और जानलेवा हमले पर उतर आए तब आम आदमी कहां जाएगा। पब्लिक क्या करेगी और किससे संरक्षण मांगेगी। हंसपुर हत्याकांड में जो कुछ सामने आया वह काफी चौंकाने वाला कहा जा सकता। सरकारी मुलाजिम पब्लिक की सुनने के लिए है, ना कि पब्लिक को पिटने और जान से मारने के लिए।हंसपुर में तो यही हुआ। एसडीएम ने उलटी गंगा बहा दी है। आदिवासी किसान की इतनी पिटाई कि जान ही चली गई। रक्षक जब भक्षक बन जाए तब पब्लिक क्या करेगी कहां जाएगी और किससे मदद मांगेगी। बहरहाल एसडीएम को किए की थोड़ी सजा मिल गई है। पूरी सजा भुगतनी बाकी है। जो कुछ भी हुआ और जो सीन दिखाई दी उसे ठीक नहीं कहा जा सकता। पब्लिक का गुस्सा फूट पड़े तब क्या होगा।
फर्जीवाड़ा का इंतहा हो गया, अब खाएंगे जेल की हवा
शिक्षक समाज का बड़ा चेहरा होता है। एक वो भी जमाना था, जब गांव में गुरुजी जो बोल देते थे, पत्थर की लकीर होती थी। ग्रामीण से लेकर पढ़ने वाले बच्चे आंख बंद कर उनकी बातों पर भरोसा किया करते थे। छोटी मोटी समस्याओं को गुरुजी बैठे-बैठे हल कर दिया करते थे। समय के साथ जमाना भी बदला और गुरुजी भी। हम बात कर रहे हैं जांजगीर चांपा जिले के एक फर्जीवाड़े का जिसमें एक युवक ने फर्जी मार्कशीट के भरोसे शिक्षाकर्मी की नौकरी हासिल कर ली और पढ़ाई भी कराने लगे। नौकरी की शुरुआत ही झूठ फरेब और फर्जीवाड़ा से हुआ हो तो ईमानदारी की ना तो कल्पना की जा सकती है और ना ही भरोसा। दूध का दूध और पानी का पानी हो ही गया। फर्जीवाड़ा के आरोप में अदालत ने फर्जी गुरूजी को अलग-अलग धाराओं में तीन साल, दो साल और एक-एक साल की सजा सुनाई है।
तकनीक का हुआ गजब इस्तेमाल,और पकड़े गए आरोपी
हमारी पुलिस भी अब हाईटेक हो गई है। तकनीक और सूचना प्रौद्योगिकी का जमकर इस्तेमाल करना सीख गई है। ज्वेलर्स से लूट के बाद आरोपी यूपी भाग रहे थे। यूपी पहुंच ही गए थे। बिलासपुर पुलिस को मिले पुख्ता इनपुट के दम पर मिर्जापुर पुलिस ने आरोपियों को धर दबोचा। यूपी पुलिस ने शॉर्ट एनकाउंटर भी कर दिया। अब सभी आरोपी जेल की हवा खाएंगे। इस धरपकड़ में अंतरराज्यीय गिरोह का भी खुलासा हुआ है। छत्तीसगढ़ और यूपी के अलावा अन्य राज्यों के लूट की भी जानकारी लुटेरों से मिलेगी। 24 घंटे के भीतर मामले को सुलझाने में आईजी और एसएसपी के अलावा उनकी टीम ने बखूबी भूमिका निभाई। आला अफसरों की टीम को एक शाबासी तो बनती है।
नहीं रुक रही घूसखोरी, जीरो टालरेंस को दे रहे चुनौती
आरईएस का एक एसडीओ घूस लेते पकड़ा गया है। एसीबी ने एसडीओ को रंगे नोटों के साथ रंगेहाथों पकड़ा है। राज्य सरकार ने जीरो टालरेंस का ऐलान महीनों पहले कर दिया है। सरकारी हिदायतों को सरकारी अमला ही नहीं मान रहा है। अफसर जब घूसखोर हो जाएं और काम के एवज में रुपये मांगने लगे तब तो हो गया। आप अंदाजा लगाइए, काम मिल भी जाए तो काम की गुणवत्ता कैसे रहेगी। घूसखोरी और कमोशनखोरी के तो गुणवत्ता भेंट ही चढ़ जाएगी। या यूं कहें कि क्वालिटी तो इन दोनों चीजों की भेंट चढ़ ही रही है। तभी तो सड़क उखड़ रही है, पुल-पुलिया टूट रहे हैं। राज्य की सड़कों की हालत किसी से छिपी नहीं है। जीरो टालरेंस सरकारी जांच एजेंसियों के लिए चुनौती से कम नहीं है। कैसे घूसखोरी पर अंकुश लगेगा और काम ठीक होगा, यह किसी चुनौती से कम नहीं है।
अटकलबाजी
राज्यसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। छत्तीसगढ़ की दो सीटें खाली होने वाली है। दोनों में कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य हैं। अब बाजी पलटेगी, भाजपा के हिस्से एक सीट आएगी। दावेदारों को लेकर सियासत सरगर्म होने लगा है। जिले से भी दावेदारी होने लगी है।
विधानसभा के बजट सत्र की उलटी गिनती शुरू हो गई है। वित्त मंत्री के पिटारे से इस बार क्या कुछ निकलेगा, चर्चा शुरू हो गई है। विधानसभा का बजट सत्र के दौरान एक बार फिर सीनियर विधायक अपने ही सरकार के मंत्रियों के खिलाफ तलवार भांजते दिखाई देंगे, उसी अंदाज में सवाल भी लगने लगे हैं। इस बार कौन-कौन अफसर टारगेट पर रहेंगे। अफसर दिग्गजों के चौंखठ पर हाजिरी लगाते भी नजर आ रहे हैं।
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