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February 22, 2026 10:03 am

अपराध के समय नाबालिग होने पर पीड़िता नाबालिग, आरोपी को बालिग मानकर होगी विवेचना

बिलासपुर। नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों में विवेचना को प्रभावी बनाने और दोषसिद्धि की दर बढ़ाने के उद्देश्य से पास्को अधिनियम से जुड़े मामलों को लेकर बुधवार को एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूजा जायसवाल तथा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वेसनलास टोप्पो ने जिले के विवेचकों को कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूजा जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यदि अपराध के समय पीड़िता और आरोपी दोनों नाबालिग हों, लेकिन आरोपी गिरफ्तारी के समय बालिग हो चुका हो, तो भी विवेचना में पीड़िता को नाबालिग और आरोपी को बालिग मानकर ही कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामलों में कानून की मंशा पीड़िता के संरक्षण और आरोपी की जवाबदेही सुनिश्चित करना है, इसलिए विवेचक इस बिंदु को लेकर किसी भ्रम में न रहें। उन्होंने पीड़िता की उम्र निर्धारण को विवेचना का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि उम्र तय करने के लिए 10वीं की अंकसूची, जन्म प्रमाण पत्र, नगर पालिका, नगर निगम अथवा नगर पंचायत के रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियां तथा हड्डी परीक्षण रिपोर्ट को प्राथमिक साक्ष्य के रूप में लिया जाना चाहिए। सही उम्र निर्धारण से ही पास्को अधिनियम की धाराओं का सटीक उपयोग संभव हो पाता है।


कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वेसनलास टोप्पो ने विवेचना और चालान प्रस्तुत करने के दौरान सामने आने वाली सामान्य कमियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि घटनास्थल का पटवारी नक्शा एक महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि इसका उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी कारणवश पीड़िता अपने बयान से मुकर जाती है, तब भी भौतिक, वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी सिद्ध किया जा सकता है।

वेसनलास टोप्पो ने मूकबधिर बालक-बालिकाओं से जुड़े मामलों में साक्ष्य संकलन की विशेष प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला और कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ-साथ तकनीकी दक्षता बेहद जरूरी है। एसएसपी रजनेश सिंह ने पास्को मामलों को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए विवेचकों से वैज्ञानिक, तकनीकी एवं इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि फोटो, वीडियो, इलेक्ट्रानिक डिवाइस और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से साक्ष्य संकलन कर विवेचना को मजबूत किया जाए, ताकि न्यायालय में दोषसिद्धि सुनिश्चित हो सके। कार्यशाला में एएसपी सिटी राजेन्द्र जायसवाल, एएसपी डॉ. अर्चना झा, एएसपी अनुज कुमार, एएसपी यातायात रामगोपाल करियारे, डीएसपी रश्मित कौर चावला, डीएसपी आजक डेरहा राम टंडन, डीएसपी आईयूसीए अनिता मिंज, डीएसपी लाइन मंजुलता केरकेट्टा सहित जिले के सभी थाना-चौकी प्रभारी एवं विवेचक उपस्थित रहे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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