“पांच महीनों में 14 मामले, 33 वाहन जब्त, 72 गिरफ्तारी ,सख्ती के बावजूद चुनौती बरकरार ,सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल, समाज को भी निभानी होगी जिम्मेदारी”
“ पुलिस की सख्ती जरूरी, लेकिन समाज की भूमिका भी उतनी ही अहम: सड़कें स्टंट का मंच नहीं, बल्कि सुरक्षित आवागमन का स्थान ,जब तक यह बात हर व्यक्ति अपने भीतर नहीं उतारेगा, तब तक पुलिस के अभियान के बावजूद ऐसे मामले सामने आते रहेंगे ”
छत्तीसगढ़ ।बिलासपुर में सड़क पर स्टंटबाजी की प्रवृत्ति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। पुलिस की सख्त कार्रवाई, वाहनों की जब्ती और दर्जनों गिरफ्तारी के बावजूद कुछ युवाओं के दुस्साहस में कोई कमी दिखायी नहीं देती। बीती रात तिफरा ओवरब्रिज पर खुले वाहन में स्टंटबाजी का मामला इसका ताजा उदाहरण है। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिरकार यह प्रवृत्ति रुक क्यों नहीं रही? रोड सेफ्टी विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह चुनौती अब केवल कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर हस्तक्षेप की भी मांग करती है।
तिफरा ओवरब्रिज की रात: जोखिम भरे स्टंट से दहले लोग
देर रात तिफरा ओवरब्रिज पर दो युवक खुली जीप क्रमांक OR 14 N 9559 में खतरनाक स्टंट कर रहे थे।घटना के दौरान एक युवक द्वारा पीछे बैठकर उक्त स्टंट का वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा था।वाहन की गति तेज थी और युवक बार-बार सीट से बाहर निकलकर हरकतें कर रहे थे।खुली जीप में सवार दोनो युवकों ने तेज आवाज में संगीत बजाते हुए ओवरब्रिज पर खतरनाक स्टंट किया।



राहगीरों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर सक्रिय हुई पुलिस की नाइट पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची और खतरनाक तरीके से स्टंट करने वाले दोनो आरोपियों उज्जवल कौशिक और निलेश वर्मा उर्फ रॉकी निवासी तिफरा को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ अलग अलग धाराओं के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की।यह घटना केवल नियम तोड़ने की नहीं बल्कि दूसरों की जान से खिलवाड़ करने जैसी है।
एसएसपी रजनेश सिंह की सख्त मॉनिटरिंग, फिर भी युवाओं का दुस्साहस जारी
स्टंटबाजी के इस बढ़ते चलन पर एसएसपी बिलासपुर रजनेश सिंह स्वयं लगातार कड़ी निगरानी रख रहे हैं। उन्होंने बताया शहर के प्रमुख मार्गों रिवरव्यू नेशनल हाईवे ओवरब्रिज और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर होने वाली गतिविधियों को स्वयं मॉनिटर कर रहा हूँ। स्टंटबाजी जैसी खतरनाक प्रवृत्ति किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की टीमें सीसीटीवी मॉनिटरिंग नाइट पेट्रोलिंग और आकस्मिक जांच लगातार कर रही हैं।
स्टंटबाजी का पाँच महीनों का आंकड़ा चौंकाने वाला

बिलासपुर जिले के एसएसपी ने जो आंकड़े बताए हैं उसके अनुसार पिछले पाँच महीनों में 10 स्टंटबाजी के मामले दर्ज 4 सड़क पर बर्थडे सेलिब्रेशन के प्रकरण 14 मामलों में FIR दर्ज 33 वाहन जब्त 72 आरोपी गिरफ्तार यह आँकड़े बताते हैं कि पुलिस की कार्रवाई कठोर है, लेकिन कुछ युवाओं की मानसिकता में रोमांच की चाहत कानून से बड़ी बनती जा रही है।
सोशल मीडिया की चमक और खतरे की अंधेरी सड़कें
रोड सेफ्टी विशेषज्ञों का मानना है कि आज के युवा तेजी से प्रभावित होते हैं सोशल मीडिया रील्स वायरल स्टंट वीडियो त्वरित लोकप्रियता की चाह हीरो बनने की मानसिकता लेकिन यहाँ एक बात वो भूल रहे है की ग़लत काम करने से कोई इंप्रेस नहीं होता बल्कि जेल ज़रूर पहुँच जाते है ।अक्सर युवा यह समझ नहीं पाते कि कुछ सेकेंड की वीडियो के लिए किया गया जोखिम किसी की स्थायी चोट, जान गंवाने या कानूनन सजा तक का कारण बन सकता है। 80% ऐसे मामलों में मोटिवेशन सोशल मीडिया पर पहचान ही होती है।
परिवार और समाज की भूमिका-कानून से भी ज्यादा जरूरी
सड़क सुरक्षा की लिहाज़ से यह समस्या केवल पुलिस या दंड की नहीं बल्कि समाज के सामूहिक जागरूकता की है।परिवारों को भी अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। कई बार माता-पिता को भी जानकारी नहीं होती कि बच्चे किस तरह की हरकतें कर रहे हैं।

शहर और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अभय नारायण राय कहते हैं यह केवल कानून का मुद्दा नहीं, यह सामाजिक अनुशासन का सवाल है। जब परिवार और समाज किसी गतिविधि को गलत मानने लगते हैं, तभी उसका असर दिखता है।
सड़कें सबकी हैं- रोमांच का मैदान नहीं
एसएसपी रजनेश सिंह लोगों से अपील करते हुए कहते हैं सड़कों का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करें। लापरवाही सिर्फ उन्हें नहीं, उनके परिवार और दूसरों को भी बड़ी क्षति पहुँचा सकती है। पुलिस अपना काम कर रही है, लेकिन जागरूकता और अनुशासन समाज की ओर से भी आना चाहिए।
सड़कें जीवनरेखा, स्टंट का मंच नहीं ,सवाल क्या बदलेंगे युवा?
पुलिस की सख्ती, मॉनिटरिंग और नियमित अभियान निश्चित रूप से आवश्यक हैं। लेकिन तिफरा ओवरब्रिज जैसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि चेतावनी और दंड से ज्यादा बदलाव युवाओं की मानसिकता में होना जरूरी है।सड़कें किसी भी शहर की जीवनरेखा होती हैं।वे स्टंट का मंच नहीं, बल्कि सुरक्षित आवागमन का स्थान हैं।जब तक यह बात हर व्यक्ति अपने भीतर नहीं उतारेगा, तब तक पुलिस के अभियान के बावजूद ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।
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