बिलासपुर। शहर में लगातार सामने आ रहे चाकूबाजी और गुंडागर्दी के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए बिलासपुर पुलिस ने नई रणनीति अपनाई है। अपराधियों को सिर्फ पकड़ने तक सीमित रहने के बजाय अब पुलिस उनकी अपराध प्रवृत्ति की जड़ पर प्रहार कर रही है। इसी कड़ी में पहली बार चाकूबाजी के एक मामले में सीधे वारदात को अंजाम देने वाले आरोपियों के साथ-साथ उन्हें नशे का सामान उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने इसे बीएनएस की धारा 49 के तहत दुष्प्रेरणा का मामला मानते हुए आरोपी बनाया है।

सिविल लाइन सीएसपी निमितेष सिंह ने बताया कि हाल के दिनों में चाकूबाजी और चोरी जैसे अपराधों की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि अधिकांश आरोपी नशे की गिरफ्त में रहते हैं। नशे की वजह से वे गंभीर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। इसी आधार पर एसएसपी रजनेश सिंह ने निर्देश दिए हैं कि अपराधियों को संरक्षण और नशे का सामान मुहैया कराने वाले तत्त्वों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए। इसी बीच सोमवार की रात रेलवे स्टेशन के पास हुई चाकूबाजी की घटना में जांच के दौरान पुलिस को अहम सुराग मिले। पुलिस ने तीन नाबालिगों को पकड़कर पूछताछ की तो सामने आया कि वे नशे के आदि हैं। नशे की तलब पूरी करने के लिए उन्होंने लूटपाट की योजना बनाई थी। असफल होने पर उन्होंने शहडोल निवासी समीर यादव पर चाकू से हमला कर दिया। पूछताछ में नाबालिगों ने खुलासा किया कि बंगालीपारा निवासी राहुल उन्हें नशे का सामान उपलब्ध कराता था। जब वे रुपये नहीं जुटा पाते थे तो राहुल उन्हें अपराध के लिए उकसाता था। इसी आधार पर पुलिस ने राहुल को दुष्प्रेरणा का आरोपी बनाते हुए मामला दर्ज कर लिया।
परदे के पीछे अपराध को बढ़ावा देने वालों पर शिकंजा
सीएसपी निमितेष सिंह ने स्पष्ट किया कि अब केवल प्रत्यक्ष अपराधी ही नहीं, बल्कि उन्हें अपराध की राह पर धकेलने वालों को भी समान रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। अब तक ऐसे लोग परदे के पीछे रहकर बच जाते थे और नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को अपराध में धकेलकर मोटी रकम वसूलते थे। लेकिन अब पुलिस ऐसे तत्वों को चिह्नित कर न्यायालय में पेश करेगी और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाएगी।
पहली बार हुई कार्रवाई
तारबाहर थाना पुलिस द्वारा इस तरह की कार्रवाई जिले में पहली बार की गई है। इससे पहले भी सीएसपी निमितेष सिंह की टीम ने नशे के कारोबार से जुड़े एक मामले में आरोपी की संपत्ति जब्त करने की पहल की थी। उस समय यह प्रयोग इतना प्रभावी साबित हुआ कि बाद में पूरे प्रदेश में इसे अपनाया गया। अब चाकूबाजी के मामले में प्रत्यक्ष आरोपी के साथ-साथ नशे का सामान बेचने वाले पर भी कार्रवाई कर पुलिस ने अपराध की जड़ पर चोट की है।
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