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January 20, 2026 8:18 am

हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, तृतीय श्रेणी शासकीय कर्मचारी के वेतन से नहीं कर सकते वसूली

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी कर्मचारी को अधि वेतनमान का भुगतान किया जा रहा है तो इसका मतलब ये नहीं है कि कर्मचारियों से रिकवरी की जाए। राज्य शासन की अपील को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं कांस्टेबल से की गई रिकवरी की राशि को छह प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने का निर्देश दिया है।

दिव्य कुमार साहू एवं अन्य आरक्षक एस.टी.एफ., बघेरा, जिला-दुर्ग में पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर पदस्थ हैं। पुलिस अधीक्षक (एसपी) बघेरा द्वारा उक्त आरक्षकों के विरूद्ध पूर्व के सेवाकाल में अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर वेतन से वसूली का आदेश जारी किया गया था उक्त वसूली आदेश को याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट के समक्ष रिट याचिका दायर कर चुनौती दी थी। हाई कार्ट के सिंगल बेंच द्वारा वसूली आदेश को निरस्त कर दिया गया था। सिंगल बेंच द्वारा पारितं निर्णय के विरूद्ध छत्तीसगढ़ शासन द्वारा हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के डिवीजन बेंच के समक्ष रिट अपील प्रस्तुत की गई थी। उक्त रिट अपील में याचिकाकर्तागण (कान्सटेबल) के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि उक्त आरक्षकों को अधिक वेतन भुगतान त्रुटिपूर्ण वेतन नियतन के कारण किया गया जिसमें उक्त आरक्षकों की कोई त्रुटि नहीं है जबकि यह वेतन नियतन शाखा के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की गलती है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टेट ऑफ पंजाब विरूद्ध रफीक मसीह के न्यायदृष्टांत का हवाला दिया गया जिसमें माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह निर्णय दिया गया कि त्रुटिपूर्ण वेतन नियतन के कारण किसी भी तृतीय श्रेणी के शासकीय कर्मचारियों को अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर उनके वेतन से किसी भी प्रकार की वसूली नहीं की जा सकती है। चीफ जस्टिस श्री रमेश सिन्हा एवं जस्टिस श्री बी.डी. गुरू की डिवीजन बेंच द्वारा उक्त मामले की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ शासन, पुलिस विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई रिट अपील को खारिज करते हुए आरक्षकों के पक्ष में निर्णय देते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को यह निर्देशित किया गया कि वे आरक्षकों (कान्सटेबल) के वेतन से वसूल की गई राशि 6% (छः प्रतिशत) व्याज के साथ तत्काल उन्हें वापस करें।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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