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March 29, 2026 7:31 pm

नशे के खिलाफ सख्ती की तैयारी: एनडीपीएस मामलों में चूक रोकने पुलिस की कार्यशाला, 125 अफसरों को दी गई सख्त ट्रेनिंग

“जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा ने थानों को “प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र” की संज्ञा देते हुए कहा कि अपराध का पंजीकरण ही उसके उपचार की पहली प्रक्रिया है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निष्पक्ष एवं संवेदनशील तरीके से कार्य करने पर जोर दिया”

रायपुर, 29 मार्च 2026।नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसअधिनियम से जुड़े प्रकरणों की विवेचना को अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से रायपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सर्किट हाउस स्थित कन्वेंशन हॉल में किया गया।

कार्यशाला का उद्घाटन पुलिस कमिश्नर आईपीएस डॉ. संजीव शुक्ला एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री पंकज सिन्हा, श्री शैलेश शर्मा तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद सिंह भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नरेट रायपुर एवं रायपुर ग्रामीण जिले के राजपत्रित अधिकारी, थाना प्रभारी एवं विवेचक अधिकारी शामिल हुए। कुल 125 पुलिस अधिकारियों ने प्रशिक्षण सत्र में भाग लेकर एनडीपीएस मामलों की विवेचना में होने वाली प्रक्रियात्मक त्रुटियों एवं आवश्यक सावधानियों की जानकारी प्राप्त की।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण विवेचना और सुदृढ़ साक्ष्य संकलन के माध्यम से ही दोष सिद्धि दर में वृद्धि संभव है, जिससे नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।

वहीं, जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा ने थानों को “प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र” की संज्ञा देते हुए कहा कि अपराध का पंजीकरण ही उसके उपचार की पहली प्रक्रिया है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निष्पक्ष एवं संवेदनशील तरीके से कार्य करने पर जोर दिया।

प्रशिक्षण सत्र में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेश शर्मा ने एनडीपीएस अधिनियम के प्रक्रियात्मक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी और विवेचना के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। इसके साथ ही अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंकज सिन्हा ने विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों के माध्यम से विवेचना को प्रभावी बनाने के उपायों पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित अधिकारियों ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। इस संवादात्मक सत्र ने विवेचना से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पुलिस कमिश्नर डॉ संजीव शुक्ला का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से एनडीपीएस प्रकरणों में दोष सिद्धि दर बढ़ाने तथा अवैध नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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