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March 28, 2026 5:40 pm

आर्थिक तंगी से जूझते हुए बाबूलाल हेम्ब्रम बना रहे हैं अपनी पहचान, सीनियर सर्किट में भारत का प्रतिनिधित्व करने का लक्ष्य

रायपुर, 28 मार्च 2026।झारखंड के रामगढ़ जिले के केरिबांदा गांव से आने वाले युवा वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर लगातार सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने न केवल खेल में खुद को स्थापित किया, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है।

पूर्व आर्मी कोच गुरविंदर सिंह की सलाह पर बाबूलाल ने अन्य खेलों को छोड़कर वेटलिफ्टिंग को अपनाया। हालांकि, शुरुआत में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक संसाधनों की कमी थी। सीमित साधनों के चलते उन्होंने निर्माण स्थलों पर बांस की लकड़ियों और लोहे की रॉड से अभ्यास कर अपने सपनों को जिंदा रखा।

बाद में बाबूलाल ने झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSPS) के कोचिंग सेंटर में प्रवेश लिया। यहां प्रशिक्षण के लिए उन्हें प्रतिदिन लगभग 60 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया।

हाल ही में रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में बाबूलाल ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक हासिल किया। इस उपलब्धि ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया है। बाबूलाल ने बताया कि वर्ष 2018 में जब उन्होंने इस खेल की शुरुआत की, तब उनके पास आवश्यक उपकरण और किट खरीदने के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं थे।

19 वर्षीय बाबूलाल पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनकी मां एक स्थानीय स्कूल में रसोइया हैं, जबकि पिता छोटे-मोटे कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है, लेकिन खेलो इंडिया जैसे आयोजनों में मिल रही सफलता से उन्हें उम्मीद है कि परिस्थितियां बेहतर होंगी।

बाबूलाल पहले ही आयु वर्ग की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। वर्ष 2024 में चेन्नई में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स में उन्होंने 49 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा, आईडब्ल्यूएफ वर्ल्ड यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप और एशियन जूनियर एवं यूथ चैंपियनशिप में भी उन्होंने पदक हासिल किए हैं।

वर्तमान में बाबूलाल पटियाला में राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा हैं और सीनियर सर्किट में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका लक्ष्य कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर देश का नाम रोशन करना है।

बाबूलाल ने कहा कि ट्राइबल गेम्स में मिला रजत पदक उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है और वह आगे अपने कोच के मार्गदर्शन में आगामी प्रतियोगिताओं के लिए रणनीति तैयार करेंगे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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