वर्धा।महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा तथा भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला के संयुक्त तत्त्वावधान में 25 और 26 फरवरी को ‘वंदे मातरम् के सामाजिक एवं सांस्कृतिक अवबोध’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं वंदे मातरम् पर केंद्रित प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन फिल्म अध्ययन विभाग, क्षेत्रीय केंद्र प्रयागराज द्वारा किया जाएगा।
वंदे मातरम् विषयक प्रदर्शनी का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी भवन में किया जाएगा, जबकि राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन कस्तूरबा सभागार में होगा। प्रदर्शनी का उद्घाटन 25 फरवरी को पूर्वाह्न 10 बजे कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा की अध्यक्षता में होगा। इस अवसर पर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद मराठे का सान्निध्य प्राप्त होगा, जबकि भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी मुख्य अतिथि होंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में आईसीएएस से संबद्ध इतिहासकार अखिलेश झा उपस्थित रहेंगे।
राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन 25 फरवरी को पूर्वाह्न 10:40 बजे कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा की अध्यक्षता में किया जाएगा। उद्घाटन सत्र में प्रो. मिलिंद मराठे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे तथा प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी का सान्निध्य प्राप्त होगा।
उद्घाटन सत्र के उपरांत वरिष्ठ संपादक अनंत विजय एवं ‘ऑर्गनाइजर’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर का विशेष उद्बोधन होगा। इसके पश्चात साहित्यिक उत्पत्ति एवं बौद्धिक विकास विषय पर आईजीएनसीए के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी तथा संपादक राकेश मंजुल अपने विचार व्यक्त करेंगे।
संगोष्ठी के तृतीय सत्र में ‘वंदे मातरम् की संवैधानिक यात्रा’ पर चर्चा होगी, जिसमें महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित तथा दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. सीमा सिंह वक्तव्य देंगी। प्रथम दिवस के अंतिम सत्र में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के उपाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र दुबे, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलाधिपति प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी एवं मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एशियाई अध्ययन संस्थान, कोलकाता के निदेशक प्रो. सरूप प्रसाद घोष अपने विचार रखेंगे।
दूसरे दिन के प्रथम सत्र का विषय ‘प्रतिरोध का आह्वान और जन आंदोलन का प्रतीक’ रहेगा, जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मनोज श्रीवास्तव संबोधित करेंगे। इस सत्र में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश मिश्रा तथा ऐतिहासिक अध्ययन केंद्र, जेएनयू, नई दिल्ली के डॉ. क्रिस्थु डॉस भी अपने विचार साझा करेंगे।
द्वितीय सत्र ‘वंदे मातरम् के 150 वर्षों की सांस्कृतिक यात्रा’ विषय पर केंद्रित होगा, जिसमें आईसीएएस से संबद्ध इतिहासकार अखिलेश झा एवं आईआरएस अधिकारी एवं इतिहासकार रश्मिता झा वक्तव्य देंगी।
संगोष्ठी का समापन सत्र कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित होगा, जिसमें भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी, महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित तथा वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय उपस्थित रहेंगे।
इसके अतिरिक्त 25 फरवरी की संध्या को सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत ‘बसंत उत्सव’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
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