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February 24, 2026 9:18 pm

बजट जनकल्याण नहीं, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला : डॉ. चरणदास महंत

रायपुर, 24 फरवरी।छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने वित्त वर्ष 2026-27 के राज्य बजट को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश को आगे ले जाने वाला नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं से ध्यान हटाने वाला दस्तावेज है। डॉ. महंत ने इसे जनकल्याण के संकल्प के बजाय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला बजट बताया।

डॉ. महंत ने कहा कि बजट में शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और युवाओं को रोजगार के नाम पर केवल आश्वासन दिए गए हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है। महतारी वंदन (डी.एड.) से जुड़ी महिलाओं की मांगों पर सरकार की चुप्पी और आंदोलन कर रही महिलाओं पर कार्रवाई को उन्होंने असंवेदनशील रवैया बताया।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों को निजी उद्योगपतियों के हवाले करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने जगदलपुर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्मित सरकारी अस्पताल भवन को निजी एजेंसी को किराए पर देने का निर्णय इसी नीति की ओर संकेत करता है। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि बजट में घोषित नई एजुकेशन सिटी भी निजीकरण की दिशा में जा सकती हैं।

डॉ. महंत ने कहा कि पिछले बजट में एम्स की तर्ज पर चार सिम्स और आईआईटी की तर्ज पर चार सीआईटी खोलने की घोषणा की गई थी, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के कई पद रिक्त हैं और राजधानी रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल में करोड़ों रुपये की मशीनें तकनीकी स्टाफ के अभाव में उपयोग से बाहर पड़ी हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ ग्रामीण प्रदेश है, लेकिन बजट भाषण पूरी तरह रायपुर और नवा रायपुर केंद्रित रहा। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई स्कूल शिक्षकविहीन हैं, जिनमें मुख्यमंत्री के जिले के स्कूल भी शामिल हैं, फिर भी शिक्षकों की भर्ती को लेकर बजट में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई।

डॉ. महंत ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी बजट भाषण में कोई स्पष्ट चर्चा नहीं की गई। उन्होंने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि यह बजट केवल पूर्ववर्ती योजनाओं को आगे बढ़ाने तक सीमित है और इसमें जनता की मूल समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस विकल्प नहीं है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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