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October 29, 2026 1:15 pm

समान नागरिक संहिता के प्रारूप पर बिलासपुर में मंथन, आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने दिए सुझाव

महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की मजबूती पर जोर, धार्मिक आस्था और पूजा-पद्धतियों में हस्तक्षेप नहीं करने की बात

विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे मुद्दों पर हुई चर्चा, 30 अक्टूबर तक ऑनलाइन भी दे सकेंगे सुझाव

Cbn36 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का प्रारूप तैयार करने के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में बुधवार को बिलासपुर में संभाग स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। देवकी नंदन दीक्षित सभागृह में हुई इस बैठक में आठ जिलों के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने संहिता के पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखते हुए विभिन्न सुझाव समिति के समक्ष प्रस्तुत किए।

बैठक में समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह तथा एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह, रायपुर संभागायुक्त एवं समिति के सचिव श्याम धावड़े और बिलासपुर संभागायुक्त सुनील जैन उपस्थित रहे।

महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर जोर

समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने समान नागरिक संहिता की पृष्ठभूमि और इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान में पारिवारिक मामलों से संबंधित दो दर्जन से अधिक कानून एवं प्रावधान प्रचलित हैं, जिनमें कई स्तरों पर भिन्नताएं हैं। समान नागरिक संहिता पर विचार का उद्देश्य पारिवारिक कानूनों में समानता को बढ़ावा देना तथा महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को अधिक मजबूत बनाना है।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी विभिन्न निर्णयों में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता को रेखांकित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संहिता का उद्देश्य किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति, धार्मिक आस्था या रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप करना नहीं है। इसका संबंध विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे नागरिक एवं पारिवारिक विषयों से है।

शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों और मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं के अध्ययन के आधार पर संहिता का प्रारूप तैयार किया जाएगा।

परंपराओं और कानूनी सुधारों पर खुलकर हुई चर्चा

परामर्श बैठक में बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों, धार्मिक प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों और गणमान्य नागरिकों ने विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे।

चर्चा के दौरान विभिन्न समुदायों की पारंपरिक मान्यताओं, सामाजिक प्रथाओं और कानूनी सुधारों से जुड़े पहलुओं पर विमर्श हुआ। प्रतिनिधियों ने समान नागरिक संहिता को लेकर अपनी सहमति, आशंकाएं और सुझाव सामने रखे। समिति के सदस्यों ने सभी सुझावों का अध्ययन कर प्रारूप तैयार करने की बात कही।

समिति छत्तीसगढ़ की मौजूदा विधिक व्यवस्था के साथ अन्य राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का भी अध्ययन कर रही है। विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों, विधि विशेषज्ञों की राय और कानूनी अध्ययन के आधार पर संहिता का प्रारूप तैयार कर राज्य शासन को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही आवश्यक विधायी एवं प्रशासनिक अनुशंसाएं भी दी जाएंगी।

30 अक्टूबर तक ऑनलाइन सुझाव देने का मौका

बैठक में पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से समान नागरिक संहिता की अवधारणा और इससे जुड़े प्रमुख विषयों की जानकारी दी गई। आम नागरिकों और संगठनों को भी इस प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर दिया गया है।

इच्छुक नागरिक और संगठन 30 अक्टूबर 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट ucc.cgstate.gov.in के माध्यम से अपने सुझाव दे सकते हैं। इसके अलावा ucc-chhattisgarh@cg.gov.in पर ई-मेल भेजकर भी अपनी राय और सुझाव समिति तक पहुंचाए जा सकते हैं।

विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

बैठक में रजक समाज के अध्यक्ष निलेश रजक, मराठा समाज के अध्यक्ष शशांक चौहान, जायसवाल समाज के अध्यक्ष रमेश जायसवाल, यादव समाज के अध्यक्ष यशवंत यादव, मुस्लिम समाज के मुरजता वनक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रदीप कुमार शर्मा, साहू समाज के ललित साहू, राजमहंत दसोराम खाण्डे, सुधीर खंडेलवाल, समाजसेवी एवं पत्रकार हबीब मेनन, वंदे मातरम मित्र मंडल बिलासपुर के महेंद्र जैन, अधिवक्ता नसीमुद्दीन अंसारी, आदिवासी गोंडवाना समाज के अध्यक्ष श्याम, बिलासपुर के एल्डरमैन विष्णु सोनी, कोरबा के शिक्षाविद सूर्यकुमार खूंटे, जांजगीर के विकास शर्मा, वेदप्रकाश अग्रवाल तथा बिलासपुर के पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश बाजपेयी सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, विधि विशेषज्ञ और नागरिक उपस्थित रहे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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