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October 29, 2026 1:13 pm

आजीविका डबरियों से बढ़ेगी महिलाओं की कमाई, छह माह में 50 हजार रुपये लाभ का अनुमान

सीएसआर के सहयोग से 55 महिलाएं मत्स्य पालन से जुड़ीं, धमतरी में 90 और डबरियां बनाने की तैयारी

वीबी-जी रामजी योजना के तहत जल संसाधनों को बनाया जा रहा आजीविका का साधन

Cbn36 रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए आजीविका डबरियों में मछली और झींगा पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। धमतरी जिले में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के सहयोग से 55 डबरियां बनाकर महिलाओं को मत्स्य उत्पादन से जोड़ा गया है। इस पहल से आगामी छह माह में प्रत्येक डबरी से औसतन 50 हजार रुपये लाभ मिलने का अनुमान है। इसके अलावा जिले में 90 नई आजीविका डबरियां बनाने का काम भी किया जा रहा है।

वीबी-जी रामजी योजनांतर्गत शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर विकसित करना है। इसके तहत वर्षा जल संरक्षण के लिए बनाई गई डबरियों को आय का साधन बनाया जा रहा है। महिलाएं मछली और झींगा पालन के माध्यम से गांव में ही अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर सकेंगी।

55 डबरियों में मछली और झींगा पालन

धमतरी जिले के भूखापारा, माडमशिल्ली, बिन्द्रापाली, डबरीनाला, चनागांव और छिन्दौरी सहित कई गांवों में आजीविका डबरियों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीएसआर के सहयोग से तैयार 55 डबरियों में महिलाओं को इस गतिविधि से जोड़ा गया है। अब इसी मॉडल का विस्तार करते हुए 90 और डबरियां बनाई जा रही हैं।

इस पहल के तहत प्रत्येक डबरी में 1,600 झींगा और 320 भारतीय प्रमुख कार्प प्रजाति की मछलियों के बीज डाले गए हैं। मछली और झींगा पालन को एक साथ प्रोत्साहित करने से उपलब्ध जल संसाधनों का उपयोग उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों की आय में योगदान देने के लिए किया जा सकेगा।

छह माह में 50 हजार रुपये लाभ का अनुमान

योजना के तहत प्रत्येक डबरी से आगामी छह माह में औसतन 50 हजार रुपये लाभ मिलने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, वास्तविक लाभ मछलियों और झींगों की वृद्धि, पानी की गुणवत्ता, पालन प्रबंधन, बाजार भाव और बिक्री पर निर्भर करेगा।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मछलियों की वृद्धि 800 ग्राम से एक किलोग्राम तक दर्ज की गई है। उत्पादन की बेहतर संभावनाओं को देखते हुए इस पहल से जुड़ी महिलाओं को अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है।

खेती और पशुपालन के साथ आय का नया जरिया

ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका डबरियां अब केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं हैं। इनका उपयोग मछली पालन के साथ सब्जी उत्पादन और फसलों की सिंचाई के लिए भी किया जा रहा है। इससे किसानों और ग्रामीण परिवारों को उपलब्ध संसाधनों से आय के नए अवसर मिल रहे हैं।

वहीं, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को तालाबों का पट्टा देकर मत्स्य पालन से जोड़ने की पहल भी की जा रही है। इस काम में मत्स्य विभाग की भागीदारी से महिलाओं को उत्पादन संबंधी गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

महिलाओं को गांव में ही मिलेगा रोजगार

आजीविका डबरियों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव में ही आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिलेगा। इससे परिवार की आमदनी बढ़ाने और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, महिलाओं में स्वरोजगार के प्रति विश्वास मजबूत होगा।

इस पहल की सफलता के लिए मछली पालन की तकनीक, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, आहार प्रबंधन और नियमित देखरेख के साथ उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था जरूरी होगी। उत्पादन से लेकर विपणन तक महिलाओं को तकनीकी सहयोग मिलने पर उनकी आय को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।

स्थायी आजीविका के अवसर विकसित करने पर जोर

धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध जल संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग कर महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। आजीविका डबरियों में झींगा और मछली पालन की पहल से महिलाओं को अपने गांव में ही आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सीएसआर के सहयोग से 55 महिलाओं को मत्स्य उत्पादन से जोड़ना महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसी गतिविधियों को तकनीकी मार्गदर्शन, नियमित निगरानी और बेहतर विपणन व्यवस्था से जोड़कर इनके लाभ को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।

स्थानीय संसाधनों से बढ़ेगी ग्रामीण परिवारों की आय

जिला पंचायत धमतरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए आजीविका के स्थायी अवसर विकसित करना जरूरी है। वीबी-जी रामजी योजनांतर्गत आजीविका डबरियों को उत्पादन गतिविधियों से जोड़ना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने कहा कि सीएसआर के सहयोग से 55 महिलाओं को मत्स्य उत्पादन से जोड़कर स्थानीय जल संसाधनों का सदुपयोग किया जा रहा है। इससे महिलाओं को अतिरिक्त आय अर्जित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करने में मदद मिलेगी। महिलाओं को उत्पादन से लेकर विपणन तक की प्रक्रिया में प्रोत्साहित करने से उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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