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October 29, 2026 12:54 pm

बस्तर में कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भर बन रहे युवा

2,323 पुनर्वासितों को मिला हुनर का प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार के खुल रहे नए रास्ते

नियद नेल्ला नार योजना 2.0 के तहत 1.11 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण, 50 हजार से ज्यादा को मिला रोजगार

CBN36 रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब शांति, पुनर्वास और विकास की दिशा में प्रयास तेज हो रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जा रही है। इसके तहत अब तक 2,323 पुनर्वासितों को विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं, नियद नेल्ला नार योजना 2.0 के माध्यम से दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पुनर्वासितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है।

7,567 आत्मसमर्पित माओवादियों में से 2,323 को प्रशिक्षण

राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बस्तर संभाग में कुल 7,567 आत्मसमर्पित माओवादियों में से अब तक 2,323 को विभिन्न व्यवसायों में कौशल प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और गरियाबंद जिलों में संचालित किए गए हैं।

प्रशिक्षण के तहत युवाओं को असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सोलर पीवी इंस्टॉलर, दोपहिया एवं चारपहिया वाहन मरम्मत तकनीशियन तथा सिलाई मशीन ऑपरेटर जैसे व्यवसायों में दक्ष बनाया जा रहा है। इन पाठ्यक्रमों के जरिए युवाओं को रोजगार प्राप्त करने और स्वरोजगार शुरू करने के लिए तैयार किया जा रहा है।

नियद नेल्ला नार योजना से 50 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार

बस्तर के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नियद नेल्ला नार योजना 2.0 के माध्यम से कौशल विकास एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत 10 जिलों में अब तक 1 लाख 11 हजार 165 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 50 हजार 53 युवाओं को नियोजित किया गया है।

योजना के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों में से 1,267 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और 461 युवा वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसी तरह नक्सल हिंसा से प्रभावित 779 हितग्राहियों को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि 191 हितग्राही प्रशिक्षणरत हैं। इन प्रयासों से प्रभावित परिवारों के युवाओं को आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जुड़ रहे युवा

कौशल प्रशिक्षण के साथ प्रशिक्षित युवाओं को उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। बीजापुर जिले में प्रशिक्षित युवाओं को गारमेंट फैक्ट्री, राजमिस्त्री के कार्य और सिलाई के स्वरोजगार से जोड़ा गया है। वहीं, बस्तर जिले में कुछ प्रशिक्षित युवाओं को पुलिस बल, सुरक्षा गार्ड, कृषि और श्रम कार्यों में रोजगार के अवसर मिले हैं।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य आत्मसमर्पित माओवादियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना है।

छह पुनर्वास केंद्र बने व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता

पुनर्वास प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बस्तर संभाग के आठ पुनर्वास केंद्रों में से छह को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (वीटीपी) के रूप में पंजीकृत किया गया है। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, बस्तर और कांकेर जिले के पुनर्वास केंद्र शामिल हैं।

इन केंद्रों के माध्यम से पुनर्वासित युवाओं को व्यवस्थित और रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल पीड़ित परिवारों के युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता में भी विशेष शिथिलता दी गई है। अब प्रशिक्षण-पूर्व पंजीयन के समय आधार कार्ड की अनिवार्यता नहीं होगी, हालांकि मूल्यांकन से पहले इसे अनिवार्य किया गया है। इससे दस्तावेजों के अभाव में पात्र युवाओं के प्रशिक्षण से वंचित होने की आशंका कम होगी।

हर विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की तैयारी

बस्तर के दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों तक कौशल विकास की सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रत्येक विकासखंड में एक स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की दिशा में कार्यवाही की जा रही है। बीजापुर जिले में स्किल डेवलपमेंट सेंटर के तहत असिस्टेंट मेसन पाठ्यक्रम में 30 युवाओं का प्रशिक्षण शुरू किया गया है।

वहीं, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में आवासीय प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार के लिए नवीन मद में 780 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को प्रशिक्षण की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पुनर्वास के साथ स्थायी शांति पर जोर

बस्तर में कौशल विकास और पुनर्वास की पहल को केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके जरिए आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों के विस्तार से क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ शांति और विकास का वातावरण मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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