ये क्या, रावण का मामला पहुंच गया थाने
एक अजीबो गरीब घटना घट गई। भगवान राम रावण के पुतले का दहन करते इसके पहले ही किसी ने ऐसी शरारत कर दी कि मामला सीधे थाने पहुंच गया है। राम के हाथों जलने वाले पुतले को शरारती तत्वों ने अपने ही हाथों जला दिया। बस फिर क्या था, गुस्साए समिति के लोग सीधे थाने पहुंच गए।
थानों में इन दिनों एक अजीबोगरीब मामला पहुंच गया है, जहां रावण ने राम के आने का इंतजार किए बिना ही ‘आत्महत्या’ जैसा कुछ कारनामा कर दिखाया!
हुआ यूं कि विजय दशमी के पावन मौके पर भगवान राम अपने बानर सेना के साथ मंच की ओर बढ़ ही रहे थे कि रावण के पुतले में समय से पहले ही आग लग गई। अब तक तो यह होता था कि राम के बाण से रावण जलता था, पर यहां तो रावण के पुतले ने खुद ही शॉर्टकट अपना लिया। जब तक भगवान राम, माता सीता,लक्ष्मण, हनुमान और अपने वानर सेना के साथ पहुंचते, रावण धू-धू कर जलकर राख हो चुका था।
इधर समिति वाले देखते रह गए कि अरे, हमारी स्क्रिप्ट तो धरी की धरी रह गई! ‘अरे ये क्या हो गया?’ कहते-कहते गुस्साए समिति के सदस्य सीधे पुलिस थाने पहुंच गए कि साहब, हमारे रावण को किसी ने समय से पहले ही आग के हवाले कर दिया, मुजरिमों को ढूंढो! अब रावण की इस जल्दबाजी ने समिति वालों को थाने का रास्ता दिखा दिया है और थानेदार साहब सोच में हैं कि गिरफ्तार करें तो किसे? रावण के पुतले को या फिर पुतला जलाने वाले को।
कहीं पर्दे के पीछे राजनीति तो नहीं?
मल्हार हायर सेकेंडरी स्कूल में बीते दिनो जो कुछ हुआ, उसे शिक्षा जगत और शिक्षाविद ठीक नहीं मान रहे हैं। स्कूली छात्रों को बहकाने और भड़काने से आखिर लाभ किसका होगा, मल्हार हायर सेकेंडरी स्कूल में बीते दिनों जो कुछ हुआ उसे देख और सुनकर सभी दंग रहे गए। लोग सोचने को मजबूर हो गए हैं, आखिर ऐसी भी राजनीाति चलती है। अगर चलती है तो ऐसी राजनीति किस काम की जिसमें अपने ही बच्चों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाना पड़ा। शिक्षा अधिकारियों से लेकर शिक्षक और इससे जुड़ा अमला अब उस सख्श की खोजबीन में जुटा है तो पर्दे के पीछे इस पूरे खेल को बगुलाभगत की तर्ज पर खेल रहा है। मजे की बात ये कि शिक्षा जगत से जुड़े शिक्षक नेताओं को तो यह पता लग ही चुका है कि ये बगुलाभगत महाशाय कौन हैं। पदाधिकारियों का कहना है, वक्त आने पर सस्पेंस से पर्दा उठा दिया जाएगा।
विजयादशमी के दिन महाभारत, गजब का रहा सीन
जब पूरा देश और हमारा अपना शहर मंगलवार को दशहरा मना रहा था। विजयादशमी के इस पर्व को लोग खुशी-खुशी मना रहे थे, शाम के वक्त विजयादशमी के दिन साइंस कॉलेज मैदान के मेन गेट के पास महाभारत का सीन नजर आया। हो भी क्यों ना, वर्षों से उत्सव मनाते आ रही समिति के हाथों से उत्सव का अवसर जो छिन गया। या यूं कहें छिन लिया। ऐसा पहली मर्तबे नहीं हुआ, लगातार दो साल से यही होते आ रहा है। तभी तो विजयादशमी के दिन महाभारत जैसा माहौल दिखाई दिया। हाथों तख्ती और भ्रष्टाचार का मुद्दा जोरशोर से गरमाया। अब ये तो वक्त बताएगा, इस पूरे एपीसोड का सियासी लाभ किसके हिस्से जाएगा और अपयश का भागी कौन बनेगा।
मंत्रिमंडल में फेरबदल दीपावली के बाद या फिर पहले
मंत्रिमंडल में फेरबदल और वेटिंग इन मिनिस्टर को लेकर एक बार फिर प्रदेश से लेकर शहर में चर्चा का दौर शुरू हो गया है। चर्चा के बीच अटकलबाजी भी जमकर लग रही है। वेटिंग इन मिनिस्टर को लेकर दावे किए जा रहे हैं और दावों को लेकर तर्क भी उसी अंदाज में समर्थक देने लगे हैं। मिनिस्टर बनने से लेकर बदलाव को लेकर भी चर्चा छिड़ी हुई है। बदलाव को लेकर जब चर्चा चलती है तो दिग्गजों के चेहरे रील की तरह आंखों के सामने घुमने लगती है। बदलाव जब कभी हो, इस खबर से समर्थक एक बार फिर उत्साहित नजर आने लगे हैं।
अटकलबाजी
मल्हार एपीसोड से पर्दा उठा तो कौन सा चेहरा बेनकाब होगा। चेहरा सामने आने के बाद पार्टी लेवल पर क्या होगा।
साइंस कॉलेज मैदान के बाहर दशहरा के दिन हुए महाभारत का सियासी लाभ किसे मिलेगा। कौन नुकसान में जाने वाला है।
प्रधान संपादक