
बस्तर में राखी ने बदली दुश्मनी की परिभाषा, 25 साल नक्सली संगठन में रहीं मीना ने जवानों की कलाई पर बांधी राखी
CBN36 रायपुर, 29 अगस्त। भानुप्रतापपुर के सुरक्षा बल कैंप में रक्षाबंधन पर भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई। करीब 25 साल तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहीं मीना ने सुरक्षा बल के जवानों की कलाई पर राखी बांधी। कभी जिस वर्दी से टकराव और अविश्वास रहा, उसी वर्दी के जवान ने राखी बंधवाकर बहन का रिश्ता स्वीकार किया। जवानों ने शगुन दिया और मिठाई खिलाई।
यह आयोजन महज रक्षाबंधन मनाने तक सीमित नहीं रहा। इसे बस्तर में हिंसा के लंबे दौर के बीच विश्वास बहाली और मुख्यधारा में लौटे लोगों को समाज से जोड़ने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
हाथ में हथियार की जगह राखी
करीब ढाई दशक तक नक्सली संगठन में रहीं मीना और अन्य पूर्व नक्सली महिलाओं के लिए यह पल खास था। जंगल और संघर्ष की जिंदगी के बाद अब वही हाथ जवानों की कलाई पर राखी बांध रहे थे।
कैंप पहुंचीं पूर्व नक्सली महिलाओं ने जवानों को राखी बांधी। जवानों ने भी उन्हें बहन के रूप में स्वीकार किया। इस दौरान शगुन और मिठाई देकर रिश्ते को सम्मान दिया गया।
महिला पुलिसकर्मियों ने भी बढ़ाया भाईचारे का हाथ

कार्यक्रम में महिला पुलिसकर्मियों ने भी हिस्सा लिया। कभी नक्सली हिंसा के खिलाफ अभियानों में आमने-सामने रहने वाले लोग इस दिन भाई-बहन के रिश्ते में नजर आए।
सुरक्षा बलों का मानना है कि ऐसे प्रयासों से मुख्यधारा में लौटे लोगों में भरोसा बढ़ेगा और समाज से उनकी दूरी कम होगी।
एसपी बोले- रिश्ते सामान्य होंगे
कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने इसे नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में अनूठा प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की समस्या के समाधान की दिशा में बढ़ाए जा रहे कदमों का रक्षाबंधन प्रतीक है। रिश्ते के इस धागे से रिश्ते सामान्य होंगे।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल त्योहार मनाने तक सीमित नहीं हैं। इनका उद्देश्य समाज में विश्वास बहाली को मजबूत करना और मुख्यधारा से जुड़ने की प्रक्रिया को गति देना भी है।
अतीत पीछे छोड़ नई जिंदगी की ओर
करीब 25 साल तक नक्सली संगठन में रहने के बाद मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होता। जंगल की जिंदगी और संघर्ष के लंबे दौर के बाद राखी बांधने का यह अवसर मीना और अन्य महिलाओं के लिए सामाजिक स्वीकार्यता का संकेत भी रहा।
जिस सुरक्षा व्यवस्था से कभी दूरी रही, उसी के जवान की कलाई पर राखी बांधना अतीत की कड़वाहट को पीछे छोड़कर नई जिंदगी की ओर बढ़ने की कोशिश को दिखाता है।
बस्तर में बदल रही तस्वीर

बस्तर की पहचान लंबे समय तक नक्सली हिंसा, मुठभेड़ और भय से जुड़ी रही। अब हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे लोगों के साथ विकास और विश्वास बहाली की तस्वीर भी सामने आ रही है।
गांवों में सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ सामाजिक स्तर पर भी लोगों को जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। भानुप्रतापपुर का यह रक्षाबंधन इसी बदलती तस्वीर की मानवीय झलक है।
राखी के धागे में शांति का संदेश
राखी का धागा छोटा है, लेकिन इसका संदेश बड़ा है। मुख्यधारा में लौटने वालों को समाज में स्वीकार्यता मिले, सुरक्षा बलों के साथ विश्वास कायम हो और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संवाद का रास्ता मजबूत हो -यह आयोजन इसी उम्मीद को सामने रखता है।
छत्तीसगढ़ सरकार के नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शांति, विकास और विश्वास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच यह पहल बस्तर की बदलती तस्वीर पेश करती है।
कैंप में राखी बंधने के बाद कुछ देर के लिए अतीत पीछे छूट गया। सामने न कोई पूर्व नक्सली था और न सुरक्षा बल का जवान। सामने था भाई-बहन का रिश्ता।
बस्तर में कभी बंदूक रिश्तों के बीच खड़ी थी। इस रक्षाबंधन में उसी जगह राखी का धागा था-भरोसे, रिश्ते और नए बस्तर की उम्मीद का।
प्रधान संपादक




