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August 27, 2026 9:26 pm

आरक्षण नीति और संबंधित कानूनों में सुधार की मांग, समग्र सवर्ण समाज ने सौंपा ज्ञापन

CBN36 बिलासपुर। आरक्षण नीति, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से संबंधित प्रावधानों और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 सहित विभिन्न कानूनों की समीक्षा और आवश्यक सुधार की मांग को लेकर समग्र सवर्ण समाज ने गुरुवार को जिलाधीश के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए वर्तमान नीतियों की समय-समय पर समीक्षा जरूरी है, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सके।

जाति के बजाय आर्थिक और सामाजिक आधार पर आरक्षण की मांग

ज्ञापन में कहा गया कि संविधान का मूल उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अवसर, न्याय और गरिमा प्रदान करना है। समाज के प्रतिनिधियों ने आरक्षण व्यवस्था की वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप व्यापक समीक्षा की मांग करते हुए आरक्षण का आधार जाति के स्थान पर आर्थिक एवं सामाजिक आवश्यकता बनाए जाने पर विचार करने की मांग की।

प्रतिनिधियों का कहना था कि स्वतंत्रता के समय जिन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर आरक्षण व्यवस्था लागू की गई थी, उनमें समय के साथ काफी बदलाव आया है। ऐसे में व्यापक सामाजिक संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।

एससी-एसटी एक्ट में निर्दोषों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग

ज्ञापन में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के संबंध में भी सुधार की मांग रखी गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि कानून के संभावित दुरुपयोग को रोकने के साथ-साथ निर्दोष नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए।

यूजीसी नियमों में पारदर्शिता और समान अवसर पर जोर

समाज ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर, पारदर्शिता और सभी विद्यार्थियों के लिए निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई। प्रतिनिधियों ने कहा कि किसी भी कानून और नीति का उद्देश्य सामाजिक न्याय के साथ प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना होना चाहिए।

‘रोहित वेमुला एक्ट’ की समीक्षा की मांग

ज्ञापन में कर्नाटक में लागू किए गए ‘रोहित वेमुला एक्ट’ के प्रावधानों, प्रभाव और संभावित व्यावहारिक कठिनाइयों की समीक्षा की मांग भी की गई। प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों के अधिकारों और शिक्षण संस्थानों में निष्पक्षता के बीच संतुलन बनाए जाने की बात कही।

विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग

समाज के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से आरक्षण एवं संबंधित कानूनों की वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप व्यापक समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। साथ ही सभी सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर आवश्यक संवैधानिक एवं विधायी सुधार किए जाने की अपील की।

प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी वर्ग के अधिकार समाप्त करने के उद्देश्य से नहीं है, बल्कि समान अवसर, निष्पक्षता, पारदर्शिता और आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को वास्तविक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से है।

विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष अरविंद दीक्षित, सचिव राजेश शुक्ला, संयोजक मनोज तिवारी, अनिल तिवारी, संयोजक मनीष अग्रवाल, डॉ. प्रदीप शुक्ला (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण विकास परिषद), जगदीश त्रिवेदी, मनोज शुक्ला, गोपाल मिश्रा, संदीप बाजपेयी, दिव्य प्रकाश दुबे, विनय दीक्षित, रोशन अवस्थी, अनुग्रह मिश्रा, एसएन बाजपेयी और चुट्टू अवस्थी सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सिंधी सेंट्रल पंचायत समाज के अध्यक्ष विनोद मेघानी, धनराज आहूजा, डी.डी. आहूजा, राजपूत क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष अजय सिंह परिहार, प्रियंक परिहार, खंडेलवाल समाज के अध्यक्ष आशीष खंडेलवाल, गुजराती समाज के अध्यक्ष केतन सुतारिया, अरविंद भानूशाली, हरि भाई पटेल, वितेंद्र पाठक, गोपाल जैन, पंजाबी समाज के अध्यक्ष परमजीत सिंह सलूजा, अमरजीत दुआ, नितिन छाबड़ा, राजेश आहूजा, चरणजीत गंभीर, राजेंद्र अग्रवाल राजू, कैलाश गुप्ता, वंदे मातरम मित्र मंडल के अध्यक्ष महेंद्र जैन, विंध्य ब्राह्मण समाज के आशुतोष मिश्रा, शुभम त्रिपाठी, मारवाड़ी ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष सुरेश शर्मा और ईश्वर तिवारी समेत बड़ी संख्या में समाज के सदस्य मौजूद रहे।

समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार से अपेक्षा जताई कि इन विषयों पर गंभीरता से विचार करते हुए सामाजिक समरसता, समान अवसर और संवैधानिक न्याय की भावना के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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