बिलासपुर, 26 जून। नगर पंचायत मल्हार के प्रगतिशील किसान जदुनंदन वर्मा जैविक खेती के जरिए क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं। वे एक एकड़ भूमि में जैविक सब्जियों की खेती कर सालाना लगभग दो लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। वहीं आधा एकड़ में जैविक एप्पल की सफल खेती कर उन्होंने खेती में नवाचार की नई मिसाल पेश की है।

करीब दस वर्षों से जैविक पद्धति अपनाने वाले जदुनंदन वर्मा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से दूरी बनाकर गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत तथा अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग करते हैं। उनका कहना है कि इससे उत्पादन लागत कम हुई है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ी है और फसलों की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
एप्पल की खेती से मिली नई पहचान
जदुनंदन वर्मा ने करीब साढ़े तीन वर्ष पहले आधा एकड़ भूमि में एप्पल के पौधे लगाए थे। पिछले दो वर्षों से उन्हें नियमित उत्पादन मिल रहा है। उनके खेत में तैयार होने वाले जैविक एप्पल की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग है। ग्राहक सीधे खेत पहुंचकर फल खरीद रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिल रही है और जैविक उत्पादों के प्रति लोगों का भरोसा भी बढ़ा है।
प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का मिला लाभ
उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जैविक खाद निर्माण, जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी मिली, जिसे उन्होंने अपनी खेती में सफलतापूर्वक अपनाया। साथ ही उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का भी नियमित लाभ मिल रहा है, जिससे खेती की लागत कम करने में मदद मिली है।
जदुनंदन वर्मा का कहना है कि जैविक खेती केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मिट्टी, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि वैज्ञानिक तकनीकों, नवाचार और सरकारी योजनाओं का समुचित उपयोग कर खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
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