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April 11, 2026 8:02 pm

दुष्कर्म और हत्या, के आरोपी की अपील हाई कोर्ट ने की खारिज

बिलासपुर। दुष्कर्म और हत्या के आरोपी की अपील को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा, चिकित्सकीय रिपोर्ट और DNA प्रोफाइलिंग इस केस में अहम सबूत है और यही सजा का मजबूत आधार भी।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नाबालिग लड़की की रेप के बाद गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने रेप और हत्या के आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी है।

डिवीजन बेंच ने इस केस में DNA प्रोफाइलिंग को सबसे अहम सबूत मानते हुए आरोपी की मौत तक कैद की सजा को बरकरार रखा है। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, DNA प्रोफाइलिंग सबसे अहम सबूत साबित हुई। कोर्ट ने कहा, अगर वैज्ञानिक सबूत मजबूत हो और गवाहों से मेल खाते हों, तो वही सजा का आधार बन सकते हैं।

छत्तीसगढ़ बीजापुर के जांगला थाना क्षेत्र में 15 साल की नाबालिग लड़की 13 जनवरी 2020 को बाजार जाने के लिए निकली थी। तब उसकी दादी ने उसे अकेले जाने से मना किया, उसी वक्त 19 वर्षीय बबलू कलमू वहां पहुंचा। उसने दादी को भरोसा दिलाया, वह बच्ची को सुरक्षित वापस ले आएगा, घर से बाजार के लिए जाने के बाद मासूम कभी घर नहीं लौटी और लापता हो गई।
लड़की का शव मिलने के बाद पुलिस ने उसका पोस्टमॉर्टम कराया। पीएम रिपोर्ट में लड़की का गला दबाकर हत्या करना पाया गया। मेडिकल रिपोर्ट में उसके साथ रेप की पुष्टि हुई। इस पर पुलिस ने रेप और हत्या का केस दर्ज कर संदेही बबलू को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश किया।
रेप और हत्या के इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह नहीं था, लेकिन पुलिस ने कड़ियां जोड़ते हुए बबलू को गिरफ्तार किया। मृतका के शरीर से मिले नमूनों का मिलान किया गया। जब आरोपी बबलू का DNA टेस्ट कराया गया और सैंपल से मैच कराया गया, तो वह पूरी तरह मैच हो गया। सुनवाई के दौरन ट्रायल कोर्ट ने इसे अहम सबूत माना। इसके अलावा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ , बच्ची की मौत गला घोंटने से हुई थी। हत्या से पहले उसके साथ दरिंदगी की गई थी। आरोपी ने ग्रामीणों के सामने भी अपना जुर्म कबूल किया था। जिसे कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण माना। दंतेवाड़ा के पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को आईपीसी की धारा 302 और धारा 376 (एबी) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए प्राकृतिक मौत तक उम्रकैद की सजा दी थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में साफ कहा है, अगर वैज्ञानिक सबूत मजबूत हो और गवाहों से मेल खाते हों, तो वही सजा का आधार बन सकता है। इस केस में मेडिकल और DNA जैसे वैज्ञानिक सबूत पूरी तरह भरोसेमंद हैं। गवाहों के बयान भी इन्हीं सबूतों से मेल खाते हैं। सभी परिस्थितियां साफ तौर पर आरोपी की ओर इशारा करती हैं। कोर्ट ने माना कि यह रेप के बाद हत्या का मामला है, जिसमें कोई संदेह नहीं बचता। हाई कोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बकरार रखा है। कोर्ट ने आरोपी को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की छूट दी है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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