बिलासपुर। परिवार न्यायालय में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 25 लाख रुपये से अधिक की ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर पहले पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद पीड़ित को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने अब धोखाधड़ी का जुर्म दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ क्षेत्र अंतर्गत चंडीपारा उरैहा निवासी अंबिका प्रसाद भारद्वाज (50) पोल्ट्री फार्म संचालक हैं। वर्तमान में वे बहतराई के दीनदयाल कॉलोनी में निवासरत हैं। अंबिका प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2023 में उनके चाचा ससुर मोहन रात्रे ने उनकी पहचान जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम छेडोलिया निवासी राजा भैया लहरे से कराई थी। परिचय के दौरान राजा भैया ने खुद को रसूखदार बताते हुए कहा कि उसकी पहचान मंत्री के ओएसडी सुरेश लहरे से है। राजा भैया ने दावा किया कि सुरेश लहरे वर्तमान में ग्राम कोसा में शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं और उनकी पहुंच के चलते परिवार न्यायालय में नौकरी लगवाना संभव है। इसके बाद राजा भैया ने अंबिका प्रसाद के बेटे राहुल और उनके भतीजे को परिवार न्यायालय में नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया। पीड़ित के अनुसार, राजा भैया ने उन्हें सुरेश लहरे से भी मिलवाया। इसके बाद दोनों आरोपियों ने फर्जी भर्ती प्रक्रिया, मेरिट सूची और साक्षात्कार का झांसा देकर अलग-अलग किस्तों में रुपये लेना शुरू कर दिया। बैंक खाते और फोन-पे जैसे माध्यमों से आरोपियों ने करीब 17 लाख 65 हजार रुपये और बाद में 7 लाख 35 हजार रुपये, कुल 25 लाख रुपये की ठगी की। इतना ही नहीं, आरोपियों ने साक्षात्कार के नाम पर पीड़ित और उसके परिजनों को कई बार रायपुर भी बुलाया, जहां केवल आश्वासन और टालमटोल की गई। लंबे समय तक नौकरी नहीं लगने और लगातार बहाने बनाए जाने पर पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। पीड़ित ने पूरे मामले की शिकायत पहले एसपी कार्यालय में की, लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर पीड़ित ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने पुलिस को मामले में धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ जुर्म दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि लेन-देन के दस्तावेजों और कॉल डिटेल्स के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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