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January 19, 2026 10:28 pm

राज्यों की विविधताओं को राष्ट्रीय एकता एक सूत्र में पिरोती है- राज्यपाल डेका

रायपुर,। राजभवन में राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में छह राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि “भारत की विविधता ही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। राष्ट्रीय एकता इन विविधताओं को एक सूत्र में बांधती है।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रारंभ ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ अभियान देश की सांस्कृतिक समृद्धि और एकता का सशक्त प्रतीक है।

विविधता भारत को विश्व में अद्वितीय बनाती है

छत्तीसगढ़ मंडपम् में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, उत्तराखंड, लक्षद्वीप और पुडुचेरी के स्थापना दिवस के अवसर पर कहा कि भाषाओं, वेशभूषा, खान-पान और परंपराओं में भिन्नता के बावजूद हमारी आत्मा एक है। यही विविधता भारत को विश्व में अद्वितीय बनाती है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” कार्यक्रम के अंतर्गत सभी राज्य एक-दूसरे के स्थापना दिवस मनाकर एकता की भावना को और प्रगाढ़ करते हैं।

कर्नाटक: विरासत और तकनीक का संगम

राज्यपाल ने कहा कि कर्नाटक प्राचीन विरासत और आधुनिक तकनीक दोनों का केंद्र है। विजय नगर साम्राज्य ने जहां कला और स्थापत्य को स्वर्णिम ऊंचाई दी, वहीं आधुनिक समय में बेंगलुरु भारत का आईटी हब बनकर विश्व में पहचान बना रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति और साहित्य ने कर्नाटक को विशिष्ट स्थान प्रदान किया है।

तमिलनाडु: द्रविड़ सभ्यता का केंद्र

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु द्रविड़ सभ्यता का प्रमुख केंद्र है। तमिल भाषा, मंदिर स्थापत्य, भरतनाट्यम, संगीत और साहित्य ने भारत की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध किया है। संगम साहित्य और तिरूक्कुरल जैसे ग्रंथों का भारतीय ज्ञान पर गहरा प्रभाव रहा है। आईटी क्षेत्र में भी तमिलनाडु देश में अग्रणी है।

दिल्ली: इतिहास और आधुनिकता का संगम

राज्यपाल ने कहा कि दिल्ली केवल राजधानी नहीं, बल्कि देश का दिल है। इन्द्रप्रस्थ से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक, इस शहर ने इतिहास को जीवंत रखा है। लालकिला, कुतुब मीनार, संसद भवन और इंडिया गेट हमारे गौरव के प्रतीक हैं। यहां की सांस्कृतिक विविधता इसे अनुपम बनाती है।

उत्तराखंड और छत्तीसगढ़: प्राकृतिक संपदा से भरपूर

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों का गठन एक ही दिन हुआ था और दोनों में कई समानताएं हैं। बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है तथा कृषि ही आजीविका का प्रमुख साधन है। हिमालयी चोटियां, नदियां और जंगल उत्तराखंड की पहचान हैं, वहीं छत्तीसगढ़ भी व्यापक वन-संपदा, नदियों और पहाड़ों से समृद्ध है। सतत् विकास और पर्यावरण संतुलन दोनों राज्यों के लिए समान चुनौती है।

पुडुचेरी और लक्षद्वीप: समृद्ध संस्कृति और प्रकृति के स्वरूप

राज्यपाल ने कहा कि पुडुचेरी अपने फ्रांसीसी स्थापत्य, आध्यात्मिक वातावरण और सांस्कृतिक समन्वय के लिए प्रसिद्ध है। सुंदर समुद्र तट और ऐतिहासिक धरोहर यहां आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

लक्षद्वीप अपने नीले जल, स्वच्छ समुद्र तटों और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। राज्यपाल ने कहा कि लक्षद्वीप की जीवनशैली दुनिया को प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

विविधता ही भारत की असली शक्ति

राज्यपाल ने कहा कि इन सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की विविधता भारत की असली शक्ति है। देश आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में इन राज्यों के योगदान को और मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने सभी नागरिकों से मानव सेवा, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आव्हान किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन

कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी संस्कृति, परंपरा और विशेषताओं पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा कर्नाटक का यक्षगान, तमिलनाडु के लोक नृत्य, दिल्ली का पंजाब फोक, उत्तराखंड का गौपति, लक्षद्वीप का छड़ी नृत्य और पुडुचेरी का गरडी नृत्य प्रस्तुत किया गया।

राज्यपाल ने प्रदान किए सम्मान

विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को राज्यपाल ने राजकीय गमछा और स्मृति चिन्ह भेंट किया। प्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने राज्यों की ओर से राज्यपाल को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।

समारोह में विधायक पुरंदर मिश्रा, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना समेत बड़ी संख्या में अधिकारी, युवा, महिलाएं और नागरिक उपस्थित थे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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