मंत्रिमंडल में फेरबदल और सियासी हलचल
मंत्रिमंडल में फेरबदल और सियासी गलियारों की हलचल किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म से कम नहीं होती। जैसे ही दिल्ली से ‘बदलाव’ की हवा चलती है, नेताओं के दिलों की धड़कनें बुलेट ट्रेन की रफ्तार पकड़ लेती है। फेरबदल असल में नेताओं के लिए ‘म्यूजिकल चेयर’ का खेल है। संगीत रुकते ही किसी की लाल बत्ती गुल हो जाती है, तो किसी बैकबेंचर की किस्मत का ताला खुल जाता है और वह सीधे अगली कतार में आ बैठता है।
राजनीति भी क्या गजब खेल खेलती है, जो कल तक ‘माननीय मंत्री जी’ थे, आज अचानक ‘संगठन के काम’ में लगा दिए जाते हैं। यह राजनीति का वो शालीन जुमला है जिसका असली मतलब होता है”बॉस, आपका काम पसंद नहीं आया, अब जरा फील्ड में पसीना बहाओ। फेरबदल के बाद दो ही तरह के चेहरे दिखते हैं। एक वो जो नई कुर्सी पाकर, मुस्कारते रहो की तर्ज पर अपनी हंसी बिखेरते रहते हैं और दूसरे वो जो ‘अंदरूनी नाराजगी’ दबाकर चाय की चुस्कियों के साथ नई रणनीति बनाने में जरा व्यस्त हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ के साय मंत्रिमंडल में एक बार फिर फेरबदल की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। हो जाए तो कुछ इसी अंदाज में माननीय लाेग नजर आएंगे।
छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल में फेरबदल, दीवाली से पहले किनका निकलेगा दीवाला
छत्तीसगढ़ की सियासत के गलियारों में इन दिनों दीवाली की पटाखों से ज़्यादा गूंज मंत्रिमंडल फेरबदल के धमाकों की है। दीवाली आने को है, लेकिन कुछ माननीय मंत्रियों के चेहरों पर रौनक की जगह ‘दिवाला’ निकलने का खौफ साफ तैर रहा है।
मुख्यमंत्री सचिवालय से छनकर आ रही खबरों ने कई ‘दिग्गजों’ की रातों की नींद उड़ा दी है। इस बार लक्ष्मीजी की कृपा सब पर बरसे न बरसे, लेकिन ‘हाईकमान’ की टेढ़ी नजर कुछ कुर्सियों को स्वाहा करने के लिए तैयार बैठी है। जो माननीय कल तक जनता को ‘अच्छे दिनों’ का लॉलीपॉप बांट रहे थे, आज खुद अपनी परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड देखकर मन ही मन ऊपर वाले को याद करने लगे हैं।
कुछ विभागों के कप्तानों ने जनता के विकास का तो पता नहीं, लेकिन अपनी विदाई का ‘दिवाला’ ज़रूर पक्का कर लिया है। चर्चा है कि जो मंत्री सिर्फ फाइलों में ‘धमाका’ कर रहे थे, उन्हें इस दीवाली ‘फुलझड़ी’ बनाकर बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। दिल्ली दरबार के सर्वे में जिन मंत्रियों की रेटिंग ‘फुस्सी बम’ जैसी आई है, उनका बोरिया-बिस्तर बंधना तय माना जा रहा है।
थानेदारों और विवेचकों को एसएसपी रिवॉर्ड
थानेदारों और विवेचकों (जांच अधिकारियों) को एसएसपी रिवॉर्ड मिलना पुलिस महकमे के लिए एक बेहद सराहनीय और सकारात्मक पहल है। कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने में इन जमीनी अधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। तभी तो जिले के कप्तान ने अपनी टीम का अच्छी तरीके से ख्याल रखा है।
जब कोई कप्तान अपने अधीनस्थ थानेदारों और विवेचकों को नकद पुरस्कार, मेडल या प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करते हैं, तो इसके कई बड़े मायने होते हैं: जाहिर सी बात है, दिन-रात तनावपूर्ण माहौल में काम करने वाली पुलिस फोर्स का उत्साह इस सम्मान से दोगुना हो जाता है। जब पुलिस त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करती है, तो समाज में सुरक्षा की भावना मजबूत होती है और खाकी के प्रति विश्वास बढ़ता है। पुलिस कप्तान के इस सोच और रिवार्ड से वाकई पुलिसिंग तो चुस्त हुई है, साथ ही जनता का भरोसा भी उसी अंदाज में बढ़ा है।
प्रदेश की सड़कें बदहाल, हिचकोले खाते माता का दर्शन
सड़कें क्या हैं, मानो साक्षात् भक्ति मार्ग है, प्रदेश की सड़कों पर चलते ही आपको अध्यात्म का ऐसा अनुभव होगा कि आप माता के दरबार पहुंचने से पहले ही राम नाम सत्य का जाप करने लगेंगे। ये गड्ढे और उड़ती धूल भक्तों की अग्नि परीक्षा से कम नहीं रहेगी।रास्ता जैसा भी हो, उबड़-खाबड़ हो, धूल उड़ती हो या फिर धूल का गुबार, माता का दर्शन तो होकर रहेगा। सड़क बनाने वाली एजेंसियों को इस नवरात्रि माता सद्बुद्धि दे, जिससे जल्द शहर से लेकर प्रदेश की सड़कें चकाचक बन जाए और लोगों की दिक्कतें तो दूर हो। आओ हम सब माता दर्शन के दौरान ये प्रार्थना जरुर करें।
अटकलबाजी
मंत्रिमंडल फेरबदल के बीच किनकी धड़कनें बढ़ने लगी है। दीवाली से पहले हो गया तब क्या होगा।
खराब सड़कों को लेकर हाई कोर्ट को क्यों गुस्सा आया।
प्रधान संपादक