
सम्मति विहार मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान, तत्त्वार्थ सूत्र वाचन और भजन प्रतियोगिता का आयोजन
CBN36 बिलासपुर। दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन बुधवार को जैन समाज ने उत्तम आर्जव धर्म दिवस मनाया। क्रांतिनगर, सरकंडा स्थित सम्मति विहार मंदिर में पूज्य 105 अकम्पमति माताजी एवं अचलमति माताजी के सानिध्य में पूजन-पाठ, अभिषेक, शांतिधारा, तत्त्वार्थ सूत्र वाचन सहित विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
प्रवचन में माताजी ने क्रोध, मान, माया और लोभ से संबंधित गुरु द्रोणाचार्य के गुरुकुल का प्रसंग सुनाया। उन्होंने उत्तम आर्जव धर्म के महत्व को बताते हुए कहा कि इस दिन माया कषाय का त्याग करने का संकल्प लेना चाहिए। जीवन में जब तक क्षमा, मार्दव और आर्जव के भाव नहीं होंगे, तब तक अंतर्मन से मायाचारी दूर नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि मन में जो भाव हों, उन्हें उसी रूप में वचनों में व्यक्त करना चाहिए। अपने वास्तविक स्वरूप को बदलकर प्रस्तुत करना ही कपट और मायाचारी है। इन भावों का त्याग करने से ही उत्तम आर्जव धर्म की प्राप्ति संभव है।
तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन

धार्मिक कार्यक्रम के दौरान तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन प्रिया जैन, श्रेया जैन, प्रिया जैन, स्वाति जैन, दिव्या जैन, अतिका जैन, श्रुति जैन और भुवि जैन ने किया। इससे पहले श्रद्धालुओं ने अभिषेक और शांतिधारा की। दशलक्षण धर्म विधान में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।
भजन प्रतियोगिता में आकृत प्रथम

देव, शास्त्र और गुरु पर आधारित भजन प्रतियोगिता में आकृत जैन ने प्रथम, संध्या जैन ने द्वितीय और सुप्रीत जैन ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। अमृता जैन को विशेष सांत्वना पुरस्कार दिया गया। ऊर्जा और अवीशी ने बिना देखे भजन प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता के निर्णायक नीरज जैन, मनीषा जैन, उषा जैन और सुनीता जैन रहे। संचालन क्षिप्रा जैन ने किया।
30 सवालों के जरिए परखी धर्म की समझ
महिला मंडल सरकंडा की ओर से खुले प्रश्न मंच का आयोजन भी किया गया। इसमें सभी आयु वर्ग के श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साह से हिस्सा लिया। दस धर्मों से जुड़े 30 प्रश्नों के माध्यम से प्रतिभागियों की धार्मिक जानकारी और समझ को परखा गया।
प्रधान संपादक




