
युवाओं को नशे से बचाने में मीडिया निभाए प्रभावी भूमिका, आपूर्ति के साथ मांग घटाने पर जोर
CBN36 राजनांदगांव, 23 अगस्त। नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल तस्करी पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जा सकता। नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति पर अंकुश लगाने के साथ उनकी मांग कम करना भी जरूरी है। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और मीडिया को मिलकर काम करना होगा। यह बात नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधीक्षक अनिल कुमार ने रविवार को कही।
वे पत्र सूचना कार्यालय की ओर से ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के तहत राजनांदगांव में आयोजित वार्तालाप कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
नशे की मांग घटाना भी बड़ी चुनौती

एनसीबी अधीक्षक ने कहा कि नशीले पदार्थों के खिलाफ रणनीति में आपूर्ति नियंत्रण के साथ मांग में कमी को भी प्राथमिकता दी जाती है। केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के समन्वय से प्रवर्तन कार्रवाई के साथ जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में स्कूलों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
मीडिया की पहुंच का इस्तेमाल जनजागरण में हो

अनिल कुमार ने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने में मीडिया की भूमिका निर्णायक है। समाचार पत्र, टीवी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया की व्यापक पहुंच का इस्तेमाल नशे के स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को सरल और तथ्यपरक तरीके से लोगों तक पहुंचाने में किया जाना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से नशामुक्त समाज के लिए सकारात्मक जनजागरूकता का माहौल तैयार करने का आह्वान किया।
पत्रकारिता को सामाजिक सरोकार से जोड़ने की जरूरत

कार्यक्रम में पत्रकार प्रियंका कौशल ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को जनआंदोलन बनाने के लिए पत्रकारिता को सामाजिक सरोकार और जनजागरण से जोड़ना होगा। केवल ‘नशा छोड़ो’ का संदेश दोहराने से बदलाव नहीं आएगा। नशे के सामाजिक कारणों, इससे प्रभावित परिवारों और नशे से बाहर निकलने वाले लोगों की वास्तविक कहानियों को सामने लाकर समाज में व्यवहार परिवर्तन का वातावरण बनाना होगा।
उन्होंने कम उम्र के बच्चों और युवाओं में नशे की शुरुआत को गंभीर चुनौती बताया। कहा कि बच्चों को नशे से बचाना केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है। समाज, मीडिया और प्रत्येक जागरूक नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी।
नशे के महिमामंडन के खिलाफ भी उठे आवाज

प्रियंका कौशल ने कहा कि फिल्मों, गीतों और सामाजिक व्यवहार में कई बार नशे को तनाव या दुख से मुक्ति के साधन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। मीडिया को ऐसी धारणाओं को चुनौती देते हुए नशे के दीर्घकालिक स्वास्थ्य, पारिवारिक और सामाजिक दुष्परिणामों को सामने लाना चाहिए।
उन्होंने अपने पत्रकारिता अनुभव का उल्लेख करते हुए रायपुर के हाटबंद क्षेत्र की रिपोर्टिंग का उदाहरण भी साझा किया, जहां नशे से प्रभावित परिवारों की स्थिति से परेशान महिलाओं ने इसके खिलाफ संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि नशे का असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार और समाज इसकी चपेट में आता है।
निर्भीक पत्रकारिता सामाजिक बदलाव का माध्यम
संपादक सुशील कोठारी और दीपक बुद्धदेव ने भी विचार रखे। दिग्विजय महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शंकर मुनि राय ने पत्रकारिता के सामाजिक दायित्व पर प्रकाश डालते हुए अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार और सामाजिक विसंगतियों के खिलाफ निर्भीक पत्रकारिता करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल निदेशक रवि जोशी, ‘नांदगांव टाइम्स’ के संपादक अशोक कुमार पांडे और वरिष्ठ पत्रकार पुरुषोत्तम तिवारी भी मंच पर मौजूद रहे।
साझा प्रयास से बनेगा नशामुक्त समाज
वक्ताओं ने कहा कि नशे के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए सरकारी प्रयासों के साथ मीडिया, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और परिवारों की साझी भागीदारी जरूरी है। पत्रकारों से छत्तीसगढ़ के युवाओं को नशे से बचाने और नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए अपनी पत्रकारिता को जनजागरूकता के अभियान से जोड़ने का आह्वान किया गया।
प्रधान संपादक




