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October 15, 2026 12:35 pm

कानाफूसी

इंजीनियर को गुस्सा क्यो आया, ड्राइवर क्यो बन गया बगुलाभगत

एक  इंजीनियर को जमकर गुस्सा आ गया, जब गुस्सा आया तो आपा भी खो गए, और उसके बाद जो कुछ हुआ, सोशल मीडिया ने उजागर कर ही दिया। ठाकुर साहब को जमकर गुस्सा आया, गुस्सा और ठाकुर साहब, फिर कहने ही क्या। अफसर के गुस्से के बीच कारण जानना भी जरुरी है। ड्राइवर ने पहले गड़बड़ी की, डांट  खाई तो महिला अफसर से सॉरी बोल दिया, फिर करने लगे नेतागीरी, बस फिर क्या था, साहब को गुस्सा आ ही गया, जब आया तब ड्राइवर का कहीं का नहीं रखा, बात कलेक्टर से होते हुए अपर कलेक्टर और अब गेंद कलेक्टर के पाले से सीधे सचिव के पास पहुंच गई है। पता नहीं अब आगे क्या होगा। सोशल मीडिया जो ना करे कम ही है। चर्चा तो  यह भी है, गोल खाने के बाद इंजीनियर साहब गोल किस ओर दागेंगे। 

कबाड़ में लाखों का चांदी, कबाड़ी की तो चांदी ही चांदी

कहावत है ना, घुरे का दिन भी बहुरता है, बहुरा भी, घुरे की जगह कबाड़ दुकान को सामने रख लेते हैं। कबाड़ दुकान का जिक्र आते ही आंखों के सामने सीन आ जाता है, अखबरों और कागजों का पहाड़ जैसा ढेर, प्लास्टिक और कांच की बोतलें, बहुत सारा लोहे का कबाड़। यही सब तो रहता है, छोटे कबाड़ी हो या फिर बड़े कबाड़ी। एक कबाड़ी की दुकान में कबाड़ के बीच लाखों रुपये की चांदी के ज्वलेरी मिल गई। आप सोच रहे होंगे, कोई जोक लिख रहे हैं या फिर आगे की बात रखने के लिए भूमिका बांध रहे हैं।  जी नहीं, यह सौ फीसदी सच है। सिटी कोतवाली पुलिस इस बात का गवाह है। थोड़ा-मोड़ा नहीं पूरे 45 लाख की चांदी पार्सल पैकेट में मिला है। कुछ चांदी मिसिंग है। कबाड़ी ने चांदी काट लिया। 

उड़ता पंजाब बनाम छत्तीसगढ़, ड्रग्स का आ रहा खेप

एक दौर था जब उड़ता पंजाब काफी चर्चा में रहा है। छत्तीसगढ़ के लिए यह खतरे की घंटी है, ड्रग्स माफिया ने छत्तीसगढ़ को टारगेट पर रखा है। हेरोइन की तस्करी धड़ल्ले से हो रही है।लेकिन आईजी रेंज और बिलासपुर जिले के पुलिस कप्तान की सजगता और कड़ाई के चलते माफिया और पैडलर की एक नहीं चल पा रही है। पैडलर की चालाकी धरी की धरी रह जा रही है। पंजाब के पैडलर की यहां के लोगों से जान पहचान, अचरज करने वाली है, बिलासपुर को छोड़िए मुंगेली तक नेटवर्क बिछ गया है। मुंगेली क्यो टारगेट पर है। ग्रामीण इलाकों में माफिया और पैडलर अपना जाल बिछाना चाहते हैं। समय रहते इस पर अंकुश लगाना ही पड़ेगा, नहीं तो उड़ता पंजाब की उड़ान छत्तीसगढ़ के कोने-कोने तक ना हो जाए। 

उप चुनाव मतलब मोहल्ले में त्योहार का मौसम

छत्तीसगढ़ में उप चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने बिगुल फूंक दिया है। नगरीय निकाय के अलावा त्रिस्तरीय ग्राम पंचायतों के भी उप चुनाव होने हैं। उप चुनाव का सीधा सा मतलब है, मतदाताओं के लिए त्योहार का मौसम। खास मतदाताओं की मेहमान नवाजी का दौर शुरू भी हो गया है, कहीं ना हो पाया हो तो, बस आजकल में शुरू हो ही जाएगा। वोटर को मैनेज करना भी सबसे ज्यादा जरुरी है। बिलासपुर में भी एक वार्ड में उप चुनाव होना है। उस वार्ड की तस्वीरें अब आने लगी है, मतदाताओं को मैनेज करने का दौर-दौरा बस अब शुरू होने ही वाला है। मतदाता हैं कि पार्टी की तरफ नजर गड़ाए हैं। वे सोच रहे हैं इंतजाम अली कौन होगा। जो उम्मीदवार वही तो रखेंगे ख्याल।

अटकलबाजी

सुशासन तिहार के मौजूदा दौर में तबादलों का दौर भी शुरू होने वाला है। वीवीआईपी बंगला बताइए जहां लिस्ट बनाने का काम चल रहा है।

पेट्रोल डीजल संकट के बीच क्या नया दिखाई दे रहा है, मीडिया में बने रहने के लिए किस तरह की मशक्कत नेताजी लोग कर रहे हैं।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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