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October 15, 2026 7:01 pm

गन्ना खरीदी मूल्य में छत्तीसगढ़ देश में नंबर वन, अब 425 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे किसानों को

355 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये किया गया गन्ने का समर्थन मूल्य, प्रति क्विंटल 70 रुपये का होगा अतिरिक्त लाभ

पेराई सत्र 2025-26 से ही लागू होगी नई दर, पहले गन्ना बेच चुके किसानों को भी मिलेगा बढ़ी हुई दर का भुगतान

31 हजार से अधिक किसानों को करीब 51.09 करोड़ रुपये का बोनस वितरित करेगी सरकार

(धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क)

CBN36 रायपुर, 15 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ना किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए गन्ने का खरीदी मूल्य 355 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय से राज्य के गन्ना किसानों को अब प्रति क्विंटल 70 रुपये अधिक मिलेंगे। खास बात यह है कि बढ़ी हुई दर पेराई सत्र 2025-26 से ही प्रभावी होगी। यानी इस सत्र में पहले ही गन्ना बेच चुके किसानों को भी बढ़ी हुई दर के अनुसार भुगतान किया जाएगा। इस फैसले के साथ ही गन्ना खरीदी मूल्य के मामले में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य बन गया है। नई दर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में निर्धारित दरों से भी अधिक है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि अन्नदाता की खुशहाली ही छत्तीसगढ़ की समृद्धि का आधार है। किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिले, खेती लाभकारी बने और किसान परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हों, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भी किसानों के हितों को अपनी नीतियों और निर्णयों के केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है। किसानों की आवश्यकताओं और समस्याओं के प्रति सरकार संवेदनशील है तथा किसान हित से जुड़े विषयों पर प्राथमिकता के साथ निर्णय लिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समृद्धि में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। खेती-किसानी मजबूत होगी तो गांव मजबूत होंगे और गांवों की समृद्धि से ही छत्तीसगढ़ की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। गन्ना खरीदी मूल्य में वृद्धि भी किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और कृषि को सम्मानजनक एवं लाभकारी आजीविका बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

प्रति क्विंटल 70 रुपये की बढ़ोतरी, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

राज्य सरकार का यह निर्णय गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। पहले किसानों को गन्ने की खरीदी के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल मिलते थे, जिसे बढ़ाकर अब 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इस तरह किसानों को प्रत्येक क्विंटल पर 70 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। गन्ना बेचने वाले किसानों को मिलने वाला अतिरिक्त भुगतान उनकी कुल आपूर्ति की मात्रा के अनुपात में होगा।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई किसान 100 क्विंटल गन्ने की आपूर्ति करता है, तो उसे पुरानी दर की तुलना में 7,000 रुपये अधिक मिलेंगे। वहीं, 500 क्विंटल गन्ना बेचने वाले किसान को 35,000 रुपये का अतिरिक्त लाभ होगा। इससे गन्ना उत्पादक किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

खेती की लागत और किसानों की आय के बीच संतुलन बनाना कृषि क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों में शामिल है। ऐसे में गन्ने के खरीदी मूल्य में बढ़ोतरी किसानों को बेहतर प्रतिफल देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेहतर मूल्य मिलने से किसान आगामी सत्रों में गन्ने की खेती के रकबे, उत्पादन लागत और संभावित लाभ का नए सिरे से आकलन कर सकेंगे।

उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से भी अधिक हुई खरीदी दर

गन्ने के कुल उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों की तुलना में भले ही कम हो, लेकिन किसानों को गन्ने का बेहतर मूल्य दिलाने के मामले में राज्य ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है। नई दर लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ में गन्ने की खरीदी 425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगी, जो उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में निर्धारित दरों से अधिक है।

देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में अगैती प्रजाति के गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 400 रुपये प्रति क्विंटल है। हरियाणा में यह दर 415 रुपये और पंजाब में 416 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके मुकाबले छत्तीसगढ़ में गन्ने का खरीदी मूल्य 425 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

वहीं, महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने का भुगतान केंद्र सरकार के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी), चीनी की रिकवरी और संबंधित चीनी मिलों की व्यवस्था के आधार पर निर्धारित होता है। केंद्र सरकार ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी के आधार पर गन्ने का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

इस प्रकार छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के गन्ना उत्पादकों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हालांकि, विभिन्न राज्यों में एसएपी और एफआरपी के निर्धारण की व्यवस्था अलग-अलग होने के कारण इन दरों की तुलना संबंधित शर्तों के संदर्भ में की जाती है।

31 हजार से अधिक किसानों को 51.09 करोड़ रुपये का बोनस

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि राज्य की चार सहकारी चीनी मिलों से जुड़े 31 हजार से अधिक किसानों को लगभग 51.09 करोड़ रुपये का बोनस वितरित किया जाएगा। राज्य सरकार का कहना है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल दिलाना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

गन्ने के खरीदी मूल्य में बढ़ोतरी और बोनस वितरण से सहकारी चीनी मिलों से जुड़े किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा। नई दर को पिछले पेराई सत्र 2025-26 से लागू करने का निर्णय भी इसी उद्देश्य से लिया गया है, ताकि मूल्य वृद्धि का लाभ केवल भविष्य में गन्ने की आपूर्ति करने वाले किसानों तक सीमित न रहे, बल्कि पहले ही गन्ना बेच चुके किसानों को भी इसका फायदा मिल सके।

सरकार का मानना है कि किसानों को बेहतर मूल्य मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। गन्ना उत्पादकों की आय में वृद्धि का असर कृषि निवेश, ग्रामीण बाजार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

छत्तीसगढ़ में हर साल 18.6 से 20.4 लाख टन गन्ने का उत्पादन

गन्ना उत्पादन के मामले में छत्तीसगढ़ देश में 14वें स्थान पर है। प्रदेश में हर साल लगभग 18.6 लाख से 20.4 लाख टन गन्ने का उत्पादन होता है। राज्य में वर्तमान में चार प्रमुख सहकारी चीनी कारखाने संचालित हैं, जिनसे बड़ी संख्या में गन्ना उत्पादक किसान जुड़े हुए हैं।

प्रदेश की प्रमुख सहकारी चीनी मिलों में भोरमदेव सहकारी चीनी मिल, कवर्धा; महामाया सहकारी चीनी मिल, सूरजपुर; सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी चीनी मिल, पंडरिया, कबीरधाम; और मां दंतेश्वरी मैय्या सहकारी चीनी मिल, बालोद शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम, सूरजपुर, जगदलपुर, सरगुजा, दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर जिलों में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इनमें कबीरधाम, जगदलपुर और सरगुजा को सर्वाधिक उत्पादन देने वाले क्षेत्रों में शामिल बताया गया है। इन क्षेत्रों में गन्ने की खेती किसानों की आजीविका और स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

किसानों की खुशहाली से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

गन्ने की खरीदी दर में वृद्धि को राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों के महत्वपूर्ण फैसले के रूप में देखा जा रहा है। प्रति क्विंटल 70 रुपये की अतिरिक्त राशि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य उपलब्ध कराएगी। वहीं, पेराई सत्र 2025-26 से नई दर लागू होने के कारण पहले गन्ना बेच चुके किसानों को भी बढ़ी हुई दर का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सरकार का संकल्प है कि किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिले, खेती लाभकारी बने और अन्नदाता निरंतर समृद्ध हों। राज्य सरकार किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर निर्णय ले रही है, ताकि कृषि क्षेत्र मजबूत हो और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आए।

छत्तीसगढ़ में गन्ना खरीदी मूल्य को 425 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ाने का निर्णय इसी दिशा में एक अहम कदम है। इससे गन्ना उत्पादक किसानों को राहत मिलने के साथ ही प्रदेश में गन्ने की खेती को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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