सीएसआर राशि का स्रोत, टेंडर और भुगतान प्रक्रिया सार्वजनिक करे नगर निगम
वर्षों से रावण दहन करा रहे अरपांचल लोक मंच के बीच नए शासकीय आयोजन की जरूरत पर उठाए सवाल
अरपांचल को अलग नगर निगम देने की समयसीमा और कार्ययोजना बताए सरकार
CBN36 बिलासपुर। अरपांचल में नगर निगम द्वारा लगभग 24 लाख रुपये की लागत से शासकीय रावण दहन एवं दशहरा उत्सव आयोजित किए जाने की जानकारी के बीच पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी ने आयोजन की वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नगर निगम से सीएसआर राशि के स्रोत, टेंडर प्रक्रिया, स्वीकृति और भुगतान से संबंधित पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
विजय केशरवानी ने कहा कि अरपांचल में अरपांचल लोक मंच द्वारा वर्षों से रावण दहन का आयोजन किया जाता रहा है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता से यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा और पहचान का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में नगर निगम द्वारा पहली बार बड़े स्तर पर शासकीय आयोजन किए जाने से पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इसकी आवश्यकता, वित्तीय व्यवस्था और आयोजन की प्रक्रिया क्या है।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन का विरोध करना नहीं है। दशहरा और रावण दहन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक परंपरा और जनभागीदारी से जुड़े आयोजन हैं। लेकिन जब किसी आयोजन पर लगभग 24 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आती है, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि यह राशि किस मद से आ रही है, किस संस्था ने उपलब्ध कराई है और इसका उपयोग किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
केशरवानी ने नगर निगम प्रशासन से सवाल करते हुए कहा कि यदि आयोजन के लिए सीएसआर राशि का उपयोग किया जा रहा है, तो यह राशि किस कंपनी या संस्था से प्राप्त हुई है? क्या राशि नगर निगम को प्राप्त हो चुकी है? यदि हां, तो राशि प्राप्त होने की तारीख, स्वीकृति आदेश और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। यदि राशि अभी प्राप्त नहीं हुई है, तो टेंडर जारी करने और आयोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का वित्तीय आधार क्या है?
उन्होंने कहा कि नगर निगम को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आयोजन का टेंडर किस विभाग या संस्था द्वारा जारी किया गया है, निविदा में कितनी एजेंसियों ने भाग लिया, चयनित एजेंसी कौन है और भुगतान किस चरण में किया जाएगा। आयोजन से संबंधित स्वीकृति, अनुमानित लागत, कार्यादेश, भुगतान शर्तें और उपयोगिता प्रमाण-पत्र की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
विजय केशरवानी ने कहा कि आयोजन की राशि को लेकर महापौर और नगर निगम आयुक्त के बयानों में यदि कोई अंतर है, तो प्रशासन को तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यह भी बताया जाना चाहिए कि राशि सीएसआर मद से प्राप्त हुई है या डीएमएफ, जिला प्रशासन अथवा किसी अन्य मद से। सीएसआर और डीएमएफ अलग-अलग वित्तीय व्यवस्थाएं हैं, इसलिए इनके नाम और स्रोत को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने नगर निगम से यह भी पूछा कि बिलासपुर नगर निगम के अंतर्गत आने वाले अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी क्या इसी प्रकार शासकीय रावण दहन का आयोजन किया जा रहा है? यदि हां, तो सभी आयोजनों की लागत, वित्तीय स्रोत और प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक की जाए। यदि केवल अरपांचल में आयोजन किया जा रहा है, तो इसके चयन का आधार और प्रशासनिक निर्णय भी जनता के सामने रखा जाए।
केशरवानी ने कहा कि अरपांचल लोक मंच द्वारा वर्षों से रावण दहन का आयोजन किया जाता रहा है। समिति स्थानीय स्तर पर सहयोग जुटाकर इस परंपरा को आगे बढ़ाती रही है। नगर निगम को इस परंपरा और स्थानीय समिति के योगदान का सम्मान करना चाहिए। शासकीय आयोजन हो या सामाजिक आयोजन, दोनों के बीच समन्वय और पारदर्शिता आवश्यक है, ताकि किसी प्रकार का विवाद या भ्रम उत्पन्न न हो।
उन्होंने कहा कि अरपांचल की जनता की सबसे बड़ी और वर्षों पुरानी मांग अलग नगर निगम के गठन की है। क्षेत्र में 24 वार्ड आते हैं और यह इलाका तेजी से विकसित हो रहा है। अरपांचल में एसईसीएल का मुख्यालय, अपोलो हॉस्पिटल सहित प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान, केंद्रीय विश्वविद्यालय, अन्य विश्वविद्यालय और बहतराई का अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल स्टेडियम जैसे महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं। इसके बावजूद क्षेत्र के कई हिस्सों में सड़क, नाली, जलभराव, साफ-सफाई, पेयजल और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं।
विजय केशरवानी ने कहा कि अरपांचल की आबादी, भौगोलिक विस्तार और संस्थागत महत्व को देखते हुए अलग नगर निगम की मांग पूरी तरह जायज है। यदि भाजपा के विधानसभा चुनाव घोषणा पत्र में अरपा पार क्षेत्र के लिए अलग नगर निगम बनाने का वादा किया गया था, तो सरकार को अब इस वादे पर स्पष्ट समयसीमा और कार्ययोजना बतानी चाहिए।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अलग नगर निगम के गठन के लिए अब तक क्या प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की गई है? क्या कोई सर्वे, सीमांकन, जनसंख्या आकलन या व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की गई है? यदि प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, तो इसे कब तक शुरू किया जाएगा? सरकार को यह भी बताना चाहिए कि अरपांचल को अलग नगर निगम का दर्जा देने का निर्णय कब तक लिया जाएगा।
केशरवानी ने कहा कि अरपांचल की जनता केवल उत्सव और घोषणाएं नहीं चाहती, बल्कि बेहतर प्रशासन और स्थायी विकास चाहती है। क्षेत्र में होने वाले सांस्कृतिक आयोजनों का स्वागत है, लेकिन इनके साथ-साथ सड़क, नाली, जल निकासी, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी प्राथमिकता से काम होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लगभग 24 लाख रुपये के आयोजन की वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना नगर निगम की जिम्मेदारी है। सीएसआर राशि का उपयोग जनहित में हो, इसके लिए पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। किसी भी आयोजन को लेकर जनता के मन में सवाल न उठें, इसके लिए प्रशासन को सभी दस्तावेज और जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
विजय केशरवानी ने कहा, “अरपांचल में दशहरा और रावण दहन की परंपरा वर्षों से चली आ रही है और अरपांचल लोक मंच इस परंपरा को लगातार आगे बढ़ाता रहा है। हम किसी सांस्कृतिक आयोजन के विरोध में नहीं हैं, लेकिन लगभग 24 लाख रुपये के शासकीय आयोजन में सीएसआर राशि के स्रोत, टेंडर और भुगतान प्रक्रिया की जानकारी जनता के सामने आनी चाहिए। साथ ही सरकार को अरपांचल के लिए अलग नगर निगम बनाने के अपने वादे पर स्पष्ट समयसीमा और कार्ययोजना बतानी चाहिए। अरपांचल को केवल आयोजन नहीं, बेहतर प्रशासन और स्थायी विकास चाहिए।”
उन्होंने कहा कि यदि नगर निगम और राज्य सरकार ने वित्तीय पारदर्शिता तथा अलग नगर निगम की मांग पर शीघ्र स्पष्ट निर्णय नहीं लिया, तो कांग्रेस कार्यकर्ता और क्षेत्र की जनता लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
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