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October 15, 2026 11:55 pm

नक्सलमुक्त बस्तर में अब विकास की बारी, 200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे सेवा डेरा

अमित शाह बोले- नक्सल हिंसा के पीड़ितों को सम्मानजनक जीवन देना संकल्प; दंतेवाड़ा में 768 दिव्यांगों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा- बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनाने पर जोर, सेवा डेरों से खुलेंगे रोजगार के रास्ते

CBN36 रायपुर, 15 अक्टूबर। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब बस्तर में विकास और पुनर्वास को गति देने की तैयारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के पांच दशक के दौर ने बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरे घाव दिए हैं। अब इन घावों पर मरहम लगाना, प्रभावित लोगों का पुनर्वास करना और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से खुशहाल और समृद्ध बनाना है। केंद्र सरकार इस काम में छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।

अमित शाह गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत दंतेवाड़ा में आयोजित दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी कार्यक्रम में शामिल हुए। तीन दिवसीय शिविर 15 से 17 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 समेत कुल 768 दिव्यांगजनों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है।

नक्सली हिंसा के पीड़ितों को फिर अपने पैरों पर खड़ा करना है

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सली हिंसा के दौरान आईईडी विस्फोटों ने अनेक निर्दोष ग्रामीणों को दिव्यांग बना दिया। उन्होंने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद भी उससे प्रभावित परिवारों की पीड़ा दूर करना जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि पीड़ितों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र और स्मार्ट वॉकिंग स्टिक जैसे उपकरण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।

शाह ने बताया कि पांच से सात अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें 1570 से अधिक बस्तर के थे। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े क्षेत्र में दशकों तक चली हिंसा से लोगों को हुए नुकसान की गंभीरता को दर्शाते हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले 8526 नक्सलियों के पुनर्वास का दावा

अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के पुनर्वास और प्रभावित इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। उनके अनुसार, करीब 8526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 7328 लोगों के बैंक खाते खुलवाए गए, 1620 को इनामी राशि और 7882 को प्रोत्साहन राशि दी गई। 455 लोगों को नौकरी और 129 को भूमि आवंटित की गई है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं और 2308 लोगों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा 6763 राशन कार्ड बनाए गए, 2808 परिवारों को मुफ्त बिजली दी गई और 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गईं। क्षेत्र में 670 पुलियों का निर्माण भी किया जा रहा है। शाह ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य नक्सल प्रभावित परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

200 से ज्यादा सुरक्षा शिविरों में अब मिलेगी सरकारी सेवाएं

बस्तर में विकास की नई पहल के तहत 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। अमित शाह ने कहा कि जिन स्थानों पर सुरक्षा बलों के जवान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, वहां अब केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी बैठकर विकास योजनाओं को आगे बढ़ाएंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है। यहां स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जंगलों में उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियों के जरिए आजीविका के अवसर विकसित किए जा रहे हैं। आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण और स्वरोजगार के काम शुरू किए जाएंगे।

बस्तर को देश का अग्रणी आदिवासी क्षेत्र बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद की दशकों पुरानी चुनौती से मुक्ति मिली है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय सुरक्षा बलों के साहस, बलिदान और बस्तर की जनता के सहयोग को दिया। नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष में शहीद हुए जवानों और हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि अब बस्तर को विकास की दौड़ में आगे लाने का समय है।

साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में शामिल करना है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, संचार और रोजगार के अवसरों का विस्तार कर रही हैं।

500 से अधिक गांवों तक पहुंचीं सड़क और बिजली की सुविधाएं

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के जरिए दूरस्थ और लंबे समय से सुविधाओं से वंचित गांवों तक विकास पहुंचाया जा रहा है। उनके अनुसार, 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं। पेयजल और दूरसंचार सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए अस्पतालों की व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने कहा कि पहले कई गांवों के लोगों को राशन लेने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। अब गांवों में ही राशन दुकानों की व्यवस्था की जा रही है, ताकि लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके।

साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों से युवाओं को खेल प्रतिभा दिखाने और जनजातीय कला-संस्कृति को आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। अब भय और हिंसा के स्थान पर शिक्षा, संस्कृति और विकास की गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं।

सिंचाई परियोजनाओं से 80 हजार एकड़ जमीन को मिलेगा पानी

मुख्यमंत्री ने बस्तर में कृषि और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए करीब 2000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इनके पूरा होने पर लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। डेयरी विकास के लिए भी समझौता किया गया है। इन प्रयासों से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद मिलेगी।

कृत्रिम अंग मिलने से लौटी उम्मीद, जवान फिर देशसेवा को तैयार

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने लाभार्थियों से बातचीत कर उनके अनुभव जाने। सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद वह फिर से चलने लगे हैं और देशसेवा के लिए तैयार हैं।

बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में चिंतावागु नदी में मछली पकड़ने जाते समय आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर चला गया था। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने से अब वह दोबारा चल पा रहे हैं। वहीं, दंतेवाड़ा जिले के अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर खुशी जताई। इससे उन्हें रोजमर्रा के आवागमन में सुविधा मिलेगी।

शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।

प्रभावितों के पुनर्वास का अभियान जारी रहेगा : विजय शर्मा

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण कई निर्दोष ग्रामीणों ने अपने हाथ-पैर गंवाए और अनेक परिवारों को जीवनभर की पीड़ा झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि हिंसा से प्रभावित कोई भी व्यक्ति पुनर्वास और जरूरी सहायता से वंचित न रहे।

शर्मा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देशानुसार प्रभावित लोगों की सहायता का अभियान लगातार जारी रहेगा। राज्य सरकार और जनप्रतिनिधि जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बस्तर में विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। सरकार का संकल्प है कि हर गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और प्रत्येक परिवार के जीवन में खुशहाली आए।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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