
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले-नवनिर्माण की ओर बढ़ रहा बस्तर, मांझियों का मानदेय 5 हजार और चालकी का 3,500 रुपये मासिक
CBN36 रायपुर, 23 अक्टूबर 2026। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल होकर जनजातीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा सामूहिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा प्रतीक है। मुरिया दरबार की परंपरा समाज के विभिन्न वर्गों को साथ बैठकर समस्याओं के समाधान का अवसर देती है, जो जमीनी लोकतंत्र का उत्कृष्ट उदाहरण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज में अपार प्रतिभाएं और संभावनाएं हैं। उचित अवसर मिलने पर यहां के युवा खेल, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों की सराहना करते हुए जनजातीय संस्कृति के संरक्षण तथा प्रकृति और वनों की रक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बस्तर विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।
राज्यपाल रमेन डेका ने बस्तर दशहरा को सामाजिक सहभागिता और लोकतांत्रिक संवाद का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि मुरिया दरबार यह संदेश देता है कि संवाद से ही समस्याओं का समाधान संभव है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हिंसक माओवाद से मुक्त होकर बस्तर अब नवनिर्माण और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार सड़क, रेल, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के लिए काम कर रही है। नियद नेल्लानार, पीएम-जनमन और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू किया गया है तथा गीदम में मेडिकल कॉलेज प्रारंभ हुआ है।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने परंपरागत प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि की है। अब मांझियों को 2,000 रुपये के स्थान पर 5,000 रुपये और चालकी को 1,500 रुपये के स्थान पर 3,500 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा। इसे बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने वाले प्रतिनिधियों के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बस्तर दशहरा समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
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