मानवाधिकार आयोग की जांच के बाद कार्रवाई, जेल भेजने से पहले मारपीट करने का आरोप; 2022 में हुई थी विचाराधीन कैदी की मौत
CBN36 जांजगीर-चांपा। जिला जेल जांजगीर में विचाराधीन बंदी की मौत के मामले में करीब तीन साल बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मानवाधिकार आयोग की जांच के बाद सामने आए तथ्यों और एसडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर आबकारी विभाग के संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस ने थाना नवागढ़ में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के तहत मामला पंजीबद्ध कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
शराब के साथ पकड़े गए थे दो लोग
मामला वर्ष 2022 का है। जानकारी के मुताबिक, 15 अप्रैल 2022 को आबकारी वृत्त शिवरीनारायण की टीम ने देवरी मोड़, केरा-बिर्रा मार्ग पर कार्रवाई करते हुए जगदीश गोंड (30), निवासी ग्राम कटौद, थाना नवागढ़ और महादेव गोंड को 30 लीटर कच्ची महुआ शराब के साथ पकड़ा था। कार्रवाई के बाद दोनों को न्यायिक रिमांड पर जिला जेल जांजगीर भेज दिया गया था।
जेल पहुंचने के अगले दिन बिगड़ी तबीयत
जेल में दाखिल किए जाने के अगले ही दिन जगदीश गोंड की तबीयत बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद थाना जांजगीर में मर्ग क्रमांक 45/2022 के तहत धारा 174 दंड प्रक्रिया संहिता में जांच शुरू की गई थी।
सहबंदी के बयान और चोट के निशान बने अहम आधार
जांच के दौरान सहबंदी के बयान और शव पंचनामा में दर्ज चोट के निशानों के आधार पर यह बात सामने आई कि जेल में दाखिल किए जाने से पहले आबकारी कर्मचारियों ने जगदीश गोंड के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी। जांच रिपोर्ट में इस मारपीट को उसकी मौत का कारण बताया गया।
अब हत्या के आरोप में दर्ज हुआ मामला
जांच प्रतिवेदन के आधार पर पुलिस ने संबंधित आबकारी कर्मचारियों के खिलाफ हत्या और समान आशय से किए गए कृत्य के आरोप में धारा 302, 34 भादवि के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले में आगे की विवेचना जारी है। पुलिस जांच के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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