प्रदेश में बिहान मिशन के तहत वनोपज के लिए जैविक प्रमाणन पाने वाली पहली महिला किसान उत्पादक कंपनी बनी माँ दंतेश्वरी कंपनी

1080 महिला शेयरधारकों और 60 उत्पादक समूहों से जुड़ी 2100 संग्राहक दीदियां; ‘दण्डक ब्रांड’ से स्थानीय उत्पादों की होगी मार्केटिंग
CBN36 रायपुर, 11 अक्टूबर। बस्तर के पारंपरिक वनोपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में दंतेवाड़ा जिले ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत गठित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड को वनोपज के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के तहत जैविक प्रमाणपत्र मिला है। इस उपलब्धि के साथ कंपनी प्रदेश में बिहान मिशन के अंतर्गत वनोपज के लिए यह प्रमाणन प्राप्त करने वाली पहली महिला किसान उत्पादक कंपनी बन गई है। इससे बस्तर के प्राकृतिक उत्पादों को नई पहचान मिलने और महिला संग्राहकों के लिए बेहतर बाजार के अवसर खुलने की उम्मीद है।
उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कंपनी से जुड़ी महिलाओं और बिहान मिशन की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्थानीय संसाधनों, जनभागीदारी और महिला सशक्तिकरण पर आधारित विकास को बढ़ावा दे रही है। माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी को मिला जैविक प्रमाणपत्र इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शर्मा ने कहा कि बस्तर की महिलाएं पीढ़ियों से वनोपज के संग्रहण और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। जैविक प्रमाणन से उनके पारंपरिक ज्ञान और मेहनत को औपचारिक पहचान मिलेगी। इससे प्रमाणित वनोपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने, बेहतर कीमत हासिल करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
उन्होंने कहा कि वनोपज के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का विस्तार होने से महिलाओं के साथ युवाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार का प्रयास है कि बस्तर के पारंपरिक उत्पादन और प्राकृतिक संसाधनों को निर्धारित मानकों के अनुरूप जैविक प्रमाणीकरण से जोड़कर स्थानीय समुदायों को उचित मूल्य और स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
1080 महिला शेयरधारक, 60 उत्पादक समूह और करोड़ से अधिक का कारोबार

वर्ष 2023 में गठित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उनकी आय बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी से वर्तमान में 1080 महिला शेयरधारक जुड़ी हैं। वहीं, जिले के 60 उत्पादक समूहों के माध्यम से 2100 वनोपज संग्राहक महिलाएं भी इसकी गतिविधियों से लाभान्वित हो रही हैं।
कंपनी ने पिछले दो वर्षों में एक करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है। पिछले वर्ष लगभग 54 लाख रुपये के उत्पादों की बिक्री हुई थी, जबकि चालू वर्ष में अब तक 50 लाख रुपये से अधिक के वनोपज की खरीदी की जा चुकी है। जैविक प्रमाणन के बाद कंपनी को उत्पादों के बेहतर मूल्य और विस्तृत बाजार उपलब्ध होने की उम्मीद है। अब कंपनी खरीदी-बिक्री के साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और पैकेजिंग पर भी जोर दे रही है।
‘दण्डक ब्रांड’ से स्थानीय उत्पादों को मिलेगी पहचान
स्थानीय उत्पादों को बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए कंपनी ने ‘दण्डक ब्रांड’ शुरू किया है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा में विशेष बिक्री केंद्र का शुभारंभ किया गया है। यहां स्थानीय खाद्य पदार्थों और वनोपज को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
दण्डक ब्रांड के तहत नीम फूल, एचएमटी चावल, लाल चूड़ी चावल, बासमती चावल, अमचूर, इमली, महुआ, कोदो, कुटकी और रागी सहित कई उत्पाद बाजार में उतारे गए हैं। आकर्षक पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन के जरिए इन उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की तैयारी है। इन उत्पादों का राज्य और देश के विभिन्न बाजारों के साथ विदेशों तक विपणन करने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
कंपनी के उत्पादों को छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों के ब्रांड ‘छत्तीसकला’ के अंतर्गत भी राज्य और देश-विदेश के बाजारों में बेचने की योजना है। एनपीओपी प्रमाणन से निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले उत्पादों की जैविक उत्पाद के रूप में बिक्री का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) सहित संबंधित संस्थाओं के सहयोग से निर्यात की संभावनाओं पर भी काम किया जा सकेगा।
बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद से महिलाओं में उत्साह

दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड के नेलेवाड़ा गांव की निवासी और कंपनी की अध्यक्ष विमला ठाकुर ने कहा कि पहले महिलाओं द्वारा संग्रहित वनोपज की बिक्री मुख्य रूप से स्थानीय बाजारों में होती थी। इसके कारण कई बार उत्पादों का अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पाता था।
उन्होंने बताया कि बिहान मिशन के सहयोग से दण्डक ब्रांड की शुरुआत और अब जैविक प्रमाणन मिलने से महिलाओं में उत्साह बढ़ा है। उन्हें उम्मीद है कि उनके उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचेंगे, बेहतर कीमत मिलेगी और परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
महिला सशक्तिकरण को मिलेगी नई मजबूती
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के नेतृत्व में जिला प्रशासन की इस पहल को बस्तर में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। जैविक प्रमाणन, स्थानीय उत्पादों का मूल्य संवर्धन और दण्डक ब्रांड के जरिए बाजार से जुड़ाव कंपनी की महिला शेयरधारकों तथा उत्पादक समूहों से जुड़ी संग्राहक दीदियों के लिए आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा कर सकता है।
बस्तर की प्राकृतिक संपदा और महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान को बाजार से जोड़ने वाली यह पहल आने वाले समय में क्षेत्र के वनोपज आधारित कारोबार को नई दिशा दे सकती है। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान मिलने के साथ ही ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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